‘दुनिया ने महाकुंभ के रूप में भारत के विराट स्वरूप के दर्शन किए’: लोकसभा में बोले प्रधानमंत्री मोदी

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‘दुनिया ने महाकुंभ के रूप में भारत के विराट स्वरूप के दर्शन किए’: लोकसभा में बोले प्रधानमंत्री मोदी

‘दुनिया ने महाकुंभ के रूप में भारत के विराट स्वरूप के दर्शन किए’: लोकसभा में बोले प्रधानमंत्री मोदी

PM Modi In Lok Sabha: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को महाकुंभ मेले के बारे में लोकसभा में कहा कि मैं पिछले सप्ताह त्रिवेणी का पवित्र जल मॉरीशस लेकर गया था। जब उस जल को मॉरीशस के गंगा तालाब में प्रवाहित किया गया तो वहां बहुत ही उत्साह और आस्था का माहौल था। पीएम ने कहा कि महाकुंभ में हमने अपनी राष्ट्रीय चेतना के विराट दर्शन किए, जो नए संकल्पों की सिद्धि के लिए प्रेरित करती है

अपडेटेड

Mar 18, 2025

पर

1:10 PM

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PM Modi In Lok Sabha: पीएम मोदी ने कहा कि पूरे विश्व ने महाकुंभ के रूप में भारत के विराट स्वरूप के दर्शन किए (फाइल फोटो)

PM Modi In Lok Sabha: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकुंभ को भारत के इतिहास में अहम मोड़ करार देते हुए मंगलवार (18 मार्च) को लोकसभा में कहा कि दुनिया ने देश के विराट स्वरूप को देखा। उन्होंने कहा कि यह सबका प्रयास का साक्षात स्वरूप था। उन्होंने निचले सदन में प्रयागराज महाकुंभ को लेकर दिए एक वक्तव्य में यह भी कहा कि महाकुंभ से ‘एकता का अमृत’ और कई अन्य अमृत निकले हैं। पीएम ने कहा कि महाकुंभ में हमने अपनी राष्ट्रीय चेतना के विराट दर्शन किए, जो नए संकल्पों की सिद्धि के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के ठीक एक साल बाद महाकुंभ के सफल आयोजन ने कुछ लोगों द्वारा हमारी क्षमता पर किए गए संदेह को धता बता दिया है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, “मैं प्रयागराज में हुए महाकुंभ पर वक्तव्य देने के लिए उपस्थित हुआ हूं। आज मैं सदन के माध्यम से देशवासियों को कोटि-कोटि नमन करता हूं जिनकी वजह से महाकुंभ का सफल आयोजन हुआ। महाकुंभ की सफलता में अनेक लोगों का योगदान है। मैं सरकार, समाज के सभी कर्मयोगियों का अभिनंदन करता हूं। मैं देश भर के श्रद्धालुओं, उत्तर प्रदेश एवं विशेष रूप से प्रयागराज की जनता का धन्यवाद करता हूं।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज मैं इस सदन के माध्यम से देशवासियों को नमन करता हूं जिनकी वजह से महाकुंभ का सफल आयोजन हुआ है। महाकुंभ की सफलता में अनेक लोगों का योगदान है। मैं सभी कर्मयोगियों का अभिनंदन करता हूं।” उन्होंने कहा कि जिस तरह से गंगा को लाने के लिए भगीरथ प्रयास हुआ था उसी तरह का महाप्रयास महाकुंभ में दिखाई दिया।

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने आगे कहा, “मैंने लाल किले से ‘सबका प्रयास’ पर जोर दिया था। पूरे विश्व ने महाकुंभ के माध्यम से भारत के विराट स्वरूप के दर्शन किए। ‘सबका प्रयास’ का यही साक्षात स्वरूप है।” उन्होंने कहा, “महाकुंभ में हमने अपनी राष्ट्रीय चेतना के जागरण के विराट दर्शन किए हैं। यह हमें नए संकल्पों की सिद्धि के लिए प्रेरित करती है।”

PM मोदी ने कहा, “महाकुंभ ने उन शंकाओं और आशंकाओं को उचित जवाब दिया है जो हमारे सामर्थ्य को लेकर कुछ लोगों के मन में रहती हैं।” उन्होंने कहा कि महाकुंभ से अनेक अमृत निकले हैं। एकता का अमृत इसका बहुत पवित्र प्रसाद है। उन्होंने कहा कि महाकुंभ ऐसा आयोजन रहा जिसमें देश के हर क्षेत्र से, हर कोने से आए लोग एक हो गए और अहम् त्याग कर वयम् के भाव से प्रयागराज में जुटे।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया, “देश के इतिहास में कई ऐसे पल आए हैं जिन्होंने देश को नई दिशा दी और देश को झकझोर कर जागृत कर दिया।” PM मोदी ने स्वामी विवेकानंद के शिकागो सर्वधर्म सम्मेलन में दिए गए भाषण, गांधीजी के ‘दांडी मार्च’ और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के ‘दिल्ली चलो’ का नारा देने जैसे ऐतिहासिक अवसरों का उल्लेख करते हुए कहा, “मैं प्रयागराज महाकुंभ को भी ऐसे ही एक अहम पड़ाव के रूप में देखता हूं जिसमें जागृत होते भारत का प्रतिबिंब दिखा।”

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक उन्होंने अपनी हालिया मॉरीशस यात्रा का जिक्र करते हुए बताया, “मैं पिछले सप्ताह त्रिवेणी का पवित्र जल मॉरीशस लेकर गया था, जब उस जल को वहां के गंगा तालाब में प्रवाहित किया गया तो वहां बहुत ही उत्साह और आस्था का माहौल था।”

प्रधानमंत्री ने लोकसभा में कहा कि महाकुंभ से प्रेरणा लेते हुए हमें नदी उत्सव की परंपरा को नया विस्तार देना होगा। उन्होंने कहा कि हमें इस बारे में जरूर सोचना चाहिए जिससे वर्तमान पीढ़ी को पानी का महत्व समझ में आएगा और नदियों की साफ-सफाई के साथ-साथ नदियों की रक्षा भी होगी। उन्होंने कहा कि भारत की नई पीढ़ी महाकुंभ से जुड़ी और यह युवा पीढ़ी आज गर्व के साथ अपनी आस्था और परंपराओं को अपना रही है।

पीएम मोदी ने कहा, “पिछले वर्ष, अयोध्या के राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में हमने महसूस किया था कि कैसे देश एक हजार वर्षों के लिए तैयार हो रहा है। इसके ठीक एक साल बाद, महाकुंभ के आयोजन ने हम सबके इस विचार को और दृढ़ किया है। देश की ये सामूहिक चेतना देश का सामर्थ्य बताती है।”

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