नेपाल ने ग्रेटर लुम्बिनी परियोजना के लिए विश्व बैंक से 85 मिलियन डॉलर का रियायती ऋण स्वीकार किया

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काठमांडू। नेपाल सरकार ने ग्रेटर लुम्बिनी परियोजना के निर्माण के लिए विश्व बैंक से 85 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर रियायती ऋण स्वीकार करने का निर्णय लिया है। संघीय मामलों एवं सामान्य प्रशासन मंत्री प्रतिभा रावल ने मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक के निर्णय की आज जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अब परियोजना का काम आगे बढ़ेगा।

यह परियोजना बुद्ध की जन्मस्थली नेपाल के लुम्बिनी को केंद्र में रखकर कपिलवस्तु, रूपन्देही और पश्चिम नवलपरासी जिलों को विकसित करने के लिए तैयार की गई है। ऋण के लिए पूर्व वित्तमंत्री विष्णु पौडेल की पहल पर पिछले वर्ष ही विश्व बैंक के समक्ष लगभग 12.5 अरब रुपये के बराबर का प्रस्ताव पेश किया गया था।

अब परियोजना कार्यान्वयन के लिए समझौता किया जाएगा। समझौते के बाद यह राशि कपिलवस्तु, रूपन्देही और नवलपरासी के बुद्ध से संबंधित क्षेत्रों के विकास में खर्च की जाएगी। लुम्बिनी विकास कोष के अनुसार, इस परियोजना के तहत तीनों जिलों में स्थित बुद्ध से जुड़े स्थलों पर पर्यटकों के लिए बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा। परियोजना का कार्यान्वयन शहरी विकास मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय के माध्यम से होगा। इसमें लुम्बिनी सांस्कृतिक नगरपालिका, देवदह, रामग्राम और कपिलवस्तु नगरपालिका सहित चार स्थानीय निकायों के साथ पुरातत्व विभाग, लुम्बिनी विकास कोष और नेपाल पर्यटन बोर्ड की भागीदारी रहेगी।

इस परियोजना के अंतर्गत सड़कों, नालियों, बस पार्क, विद्युतीकरण, बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए ध्यान केंद्र, विश्राम स्थल, कैफे, सूचना केंद्र और स्थानीय उत्पादों के बिक्री केंद्र सहित विभिन्न पर्यटकीय संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा। लुम्बिनी यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। यहां स्थित मायादेवी मंदिर, बुद्ध जन्मस्थल, पवित्र पुष्करिणी पोखरी और अशोक स्तंभ ऐतिहासिक महत्व के प्रमुख स्थल हैं। देवदह में भी बुद्ध से जुड़े कई ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल मौजूद हैं।

कपिलवस्तु का तिलौराकोट प्राचीन शाक्य राज्य की राजधानी के रूप में जाना जाता है, जहां राजकुमार सिद्धार्थ ने अपना बाल्यकाल बिताया था। पश्चिम नवलपरासी का रामग्राम स्तूप बुद्ध के मूल अवशेष सुरक्षित होने वाला एकमात्र स्तूप माना जाता है, जिसके लिए विस्तृत योजना तैयार हो चुकी है। परियोजना के पहले चरण में इन्हीं प्रमुख बौद्ध स्थलों पर काम किया जाएगा। इससे पहले, परियोजना कार्यान्वयन के लिए बुद्ध सर्किट के अंतर्गत आने वाली चारों नगरपालिकाओं ने प्रत्येक के लिए आठ मिलियन अमेरिकी डॉलर बजट सुनिश्चित करने हेतु विश्व बैंक को संयुक्त ज्ञापन पत्र भी सौंपा था।

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परियोजना का उद्देश्य निवेश के स्रोत तलाशना, नए पर्यटन स्थलों की पहचान, विकास और प्रवर्द्धन करना है। इसके लिए विशेषज्ञ स्तर पर लगातार अध्ययन और विचार-विमर्श होते रहे हैं, जिसमें विश्व बैंक के विशेषज्ञ भी शामिल रहे। इस परियोजना के माध्यम से लुम्बिनी को एक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करते हुए क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे का विकास, आर्थिक गतिविधियों का विस्तार, रोजगार सृजन और सतत शहरी विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, धरोहर संरक्षण, सुशासन और स्थानीय समुदाय की आजीविका को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

पूर्व मंत्री विष्णु पौडेल के अनुसार, बहु-क्षेत्रीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के जरिए लुम्बिनी को केंद्र में रखकर धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक संरक्षण और सतत आर्थिक समृद्धि का एक मॉडल क्षेत्र विकसित करने की योजना बनाई गई है। परियोजना का लक्ष्य पर्यटकीय ढांचे को मजबूत करना, सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण करना और धार्मिक सहिष्णुता व सांस्कृतिक विविधता के आधार पर लुम्बिनी को विश्व शांति और सतत पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाना है।

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