फर्जी एप का लिंक भेजकर पीड़ित के बैंक खाते से 1.27 करोड़ की साइबर ठगी, एक गिरफ्तार

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कानपुर। व्हाट्सएप पर आरटीओ चालान और सरकारी योजनाओं के नाम से भेजी गई फर्जी एप लिंक फाइल के जरिए मोबाइल हैक कर साइबर ठगों ने एक व्यक्ति के बैंक खातों से 1.27 करोड़ रुपये पार कर दिए। मामले की जांच में जुटी साइबर क्राइम पुलिस ने गिरोह के एक सदस्य को मेरठ से गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य आरोपितों की तलाश की जा रही है।

पुलिस उपायुक्त अपराध श्रवण कुमार सिंह ने मंगलवार को बताया कि पीड़ित ने अगस्त 2025 में साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उसके मोबाइल पर व्हाट्सएप के माध्यम से कई फाइलें भेजी गई थीं, जिन पर प्रधानमंत्री किसान योजना, आरटीओ चालान और बैंक आधार अपडेट जैसे संदेश लिखे थे। इन्हीं में से एक फाइल को आरटीओ चालान समझकर खोलते ही उसका मोबाइल फोन हैक हो गया।

इसके बाद साइबर अपराधियों ने तकनीकी तरीके से मोबाइल नंबर का सिम स्वैप कर लिया और ऑनलाइन बैंकिंग पर नियंत्रण हासिल कर लिया। कुछ ही समय में पीड़ित के अलग-अलग बैंक खातों से करीब एक करोड़ 27 लाख रुपये की धनराशि ट्रांसफर कर ली गई। घटना की जानकारी होते ही पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और बाद में थाने में लिखित तहरीर दी।

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने बैंक खातों के लेनदेन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों की पहचान की। इसी क्रम में साइबर क्राइम थाने की टीम ने मेरठ में दबिश देकर एक आरोपित अरशद अंसारी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित के कब्जे से फर्जी दस्तावेजों से संबंधित सामग्री और बैंकिंग से जुड़े उपकरण भी बरामद किए गए हैं।

पूछताछ में आरोपित ने बताया कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी पहचान पत्रों के जरिए बैंक खाते खुलवाए थे, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम जमा कराने के लिए किया जाता था। बाद में रकम को अलग-अलग माध्यमों से निकाल लिया जाता था।

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डीसीपी ने बताया कि आरोपित ने ठगी की रकम का एक बड़ा हिस्सा सोना खरीदने में भी खर्च किया था। मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। इस पूरे मामले का खुलासा करने वाली साइबर क्राइम पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का पुरस्कार भी घोषित किया गया है।

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