चीन से व्यापारिक संबंध तोड़ने के लिए अमेरिका डाल रहा दबाव : उरुग्वे

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मोंटेवीडियो। दक्षिण अमेरिकी देश उरुग्वे पर अमेरिका लगातार दबाव बना रहा है कि वह चीन के साथ अपने व्यापारिक संबंध खत्म करे। यह खुलासा उरुग्वे के अर्थव्यवस्था और वित्त मंत्री गैब्रियल ओडोन ने एक निजी बैठक में किया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वित्त मंत्री ओडोन ने कहा कि अमेरिका का यह दबाव “अकल्पनीय” और “असहनीय” है, जो रोज़ाना अलग-अलग माध्यमों से डाला जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उरुग्वे वाशिंगटन की मांगों को नहीं मानता तो डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के साथ उसके व्यापारिक संबंध और बिगड़ सकते हैं।

करीब 35 लाख की आबादी वाले उरुग्वे के लिए चीन पिछले 14 वर्षों से सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है। देश के कुल निर्यात का लगभग 26% चीन को जाता है, जिसमें बीफ़, सोयाबीन और सेल्युलोज़ जैसे प्रमुख उत्पाद शामिल हैं।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और चीन के बीच भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। इसका असर उन देशों पर साफ दिख रहा है, जिनके व्यापारिक संबंध दोनों शक्तियों के साथ हैं।

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घरेलू स्तर पर उरुग्वे की अर्थव्यवस्था भी दबाव में है। उरुग्वे का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2025 में 1.8% बढ़ा, जो 2.6% के आधिकारिक अनुमान से कम था। वहीं 2026 के लिए विकास दर का अनुमान घटकर करीब 1.6% रह गया है।

मंत्री ओडोन ने इन चुनौतियों के बावजूद अर्थव्यवस्था का बचाव करते हुए कहा कि कठिन वैश्विक परिस्थितियों के बीच भी देश लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्हाेंने स्पष्ट किया कि उरुग्वे अपनी प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए मुद्रा को कमजोर नहीं करेगा। इसके बजाय सरकार छोटे-छोटे आर्थिक सुधारों, लागत कम करने और विदेशी व्यापार को आसान बनाने पर ध्यान देगी।

फिलहाल, अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती खींचतान अब छोटे देशों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। उरुग्वे जैसे देशों के सामने संतुलन बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है, जहां एक ओर आर्थिक हित हैं तो दूसरी ओर वैश्विक राजनीतिक दबाव।

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