
Cinema Ka Flashback: बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान की फिल्म पहेली (2005) एक अनोखा उदाहरण है कि कैसे कोई फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल होने के बावजूद आलोचकों और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के बीच सराहना पा सकती है।
शाहरुख खान की सबसे बड़ी फ्लॉप फिल्म फिर भी जीते 15 अवॉर्ड्स
2005 में रिलीज हुई शाहरुख खान की फिल्म ‘पहेली’ बॉलीवुड इतिहास की उन रचनाओं में शुमार है, जो व्यावसायिक असफलता के बावजूद आलोचकों के दिलों पर राज कर गई। निर्देशक अमोल पालेकर के हाथों सजाई गई यह फंतासी ड्रामा राजस्थानी लोककथा ‘दुविधा’ पर आधारित थी, जिसमें शाहरुख ने डबल रोल निभाया था। फिल्म का निर्माण उनकी पत्नी गौरी खान ने किया था और इसकी शूटिंग महज 45 दिनों में पूरी हो गई। 14 करोड़ रुपये के बजट पर बनी ‘पहेली’ ने भारत में एवरेज वर्डिक्ट हासिल किया, लेकिन विदेशी बाजारों में यह सुपरहिट साबित हुई, जहां इसने कुल 32 करोड़ रुपये की कमाई की।
फिल्म की कहानी एक नवविवाहित दुल्हन लच्छी (रानी मुखर्जी) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने पति (शाहरुख) के साथ खुशहाल जीवन जीने को आतुर है। लेकिन एक रहस्यमयी भूत (शाहरुख का दूसरा रोल) उसके जीवन में दखल देता है। यह फंतासी प्रेम त्रिकोण दर्शकों को लोक संस्कृति और जादू के मिश्रण में ले जाता है। सहायक भूमिकाओं में अमिताभ बच्चन, जूही चावला, अनुपम खेर, नीना गुप्ता और सुनील शेट्टी ने जान फूंकी। खास बात यह रही कि अमिताभ ने एक दृश्य में शाहरुख को घड़े में बंद कर दिया था, जो फिल्म का यादगार पल बन गया। सिनेमैटोग्राफी, प्रोडक्शन डिजाइन और वेशभूषा की जमकर तारीफ हुई, हालांकि स्क्रिप्ट को मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिलीं।
‘पहेली’ की सबसे बड़ी खासियत रही इसके 15 प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स। इन्हें विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया, जिनमें फिल्मफेयर, नेशनल अवॉर्ड्स और इंटरनेशनल सम्मानों ने जगह बनाई। यह फिल्म भारत की ओर से 79वें अकादमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर) के लिए आधिकारिक प्रविष्टि चुनी गई थी। हालांकि, वैश्विक प्रचार की कमी के कारण यह नॉमिनेशन हासिल न कर सकी। जिम्बाब्वे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, संडेंस और पाम स्प्रिंग्स जैसे मंचों पर इसकी स्क्रीनिंग हुई, जहां दर्शकों ने इसे सराहा।
रोचक तथ्य यह है कि लच्छी का रोल निभाने से पहले चार बड़ी अभिनेत्रियां- काजोल, ऐश्वर्या राय, तब्बू और सुष्मिता सेन- ने इसे ठुकरा दिया था। कारण स्पष्ट नहीं, लेकिन रानी मुखर्जी को यह मौका मिला और उन्होंने इसे यादगार बना दिया। शाहरुख-रानी की जोड़ी पहले ‘कभी खुशी कभी गम’ जैसी हिट दे चुकी थी, लेकिन यहां फ्लॉप ने उनके प्रयोग की मिसाल कायम की। 20 साल बाद भी ‘पहेली’ साबित करती है कि सच्ची कला बॉक्स ऑफिस से परे होती है। यह फिल्म सिनेमा प्रेमियों के लिए एक छिपा रत्न बनी हुई है, जो कला और व्यावसायिकता के फर्क को उजागर करती है।
हालांकि फिल्म ने भारत में लगभग 14 करोड़ रुपये की लागत के मुकाबले बहुत कम कमाई की, लेकिन इसकी कलात्मकता और अनोखी कहानी ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। पहेली को भारत की ओर से ऑस्कर में बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म कैटेगरी के लिए भी भेजा गया था, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी।
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