प्रिटिंग-स्टेशनरी के निदेशक पर अवमानना आरोप निर्मित

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–कोर्ट ने पूछा, क्यों न किया जाय अवमानना में दंडित

प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रिटिंग एंड स्टेशनरी प्रयागराज के निदेशक पुनीत कुमार तिवारी को प्रोन्नति में आरक्षण से जुड़े मामले में आदेश की अवहेलना करने पर अवमानना का आरोप निर्मित कर कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

कोर्ट ने एक माह में सफाई मांगी है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही कर दंडित किया जाय। याचिका की अगली सुनवाई के लिए अप्रैल नियत की है और उस दिन निदेशक को हाजिर रहने का निर्देश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने असद उल्लाह की अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने चार दिसम्बर 2025 को भी आदेश का पालन करने के लिए अंतिम अवसर दिया था। लेकिन निदेशक ने ऐसा नहीं किया। कोर्ट ने कहा, लगता है कि अधिकारी को कोर्ट के आदेशों का कोई सम्मान नहीं है। इससे पहले 28 मार्च 2025 को कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए आदेश दिया था कि याची चार सप्ताह के भीतर नया प्रत्यावेदन सक्षम प्राधिकारी के पास देगा और उस पर निर्णय दो महीने के भीतर लिया जाएगा। याची ने कोर्ट में यह कहते हुए अवमानना याचिका दायर की कि तीन सितम्बर 2025 से आज तक न न्यायालय के आदेश का अनुपालन किया और न ही निदेशक, मुद्रण एवं लेखन सामग्री न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुए।

वर्ष 2018 में आठ कार्मिकों की पदावनति आदेश जारी किया गया था जो अवैधानिक रूप से प्रोन्नत पदों पर कार्यरत रहे, लेकिन इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। याची का कहना है कि संयुक्त निदेशक को पत्र के माध्यम से निदेशक आदेशित तो करते हैं, लेकिन संयुक्त निदेशक उस आदेश का पालन नहीं करते, बल्कि निदेशक को यह सूचित करते हैं कि यह मेरा क्षेत्राधिकार ही नहीं है और न ही मेरा दायित्व है। अधिकारी एक दूसरे पर मामला थोप रहे हैं।

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निदेशक का कहना था कि आदेश का पालन संयुक्त निदेशक को करना है। इस पर कोर्ट ने पूछा क्या निदेशक सक्षम अधिकारी नहीं है तो कहा सक्षम अधिकारी हैं। इस पर कोर्ट ने कहा विपक्षी जानबूझ कर आदेश की अवहेलना कर रहा है और आरोप निर्मित कर सफाई के साथ तलब किया है।

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