संभल। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल में रमज़ान के दौरान नमाज़ पढ़ने पर प्रतिबंध से जुड़े मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं है तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या स्थानांतरण ले लेना चाहिए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने पर संभल के डीएम और एसपी को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि प्रशासन मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित नहीं कर सकता है। अगर डीएम और एसपी को लगता है कि वे कानून व्यवस्था नहीं संभाल पा रहे हैं तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए या ट्रांसफर करवा लेना चाहिए। हर परिस्थिति में कानून व्यवस्था बनाए रखना उनका काम है।
याचिकाकर्ता मुनाजिर खान के मुताबिक, पिछले साल फरवरी महीने में हयातनगर थाने से पुलिस वाले आए। उन्होंने कहा कि सिर्फ 20 लोग ही मस्जिद में नमाज पढ़ सकते हैं। एक बार में 5 से 6 लोग ही नमाज अदा करें।
इसके बाद 18 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट में 27 फरवरी को पहली सुनवाई हुई। शनिवार को आदेश हाईकोर्ट की साइट पर अपलोड हुआ। 16 मार्च को मामले पर अगली सुनवाई होगी। हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि रमजान के दौरान मस्जिद में नमाज अदा करने से रोका जा रहा है। रमजान चल रहा है। ऐसे में परिसर के भीतर नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग आ सकते हैं।
वहीं, सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने नमाजियों की संख्या सीमित करने का आदेश दिया था। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने सरकार के वकील के तर्क को खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आपने अब तक मस्जिद या नमाज की जगह की कोई तस्वीर कोर्ट में दाखिल नहीं की है। इस पर याचिकाकर्ता ने समय मांगा। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें नमाज की जगह की तस्वीरें और राजस्व रिकॉर्ड दाखिल करने के लिए अनुमति दे दी। अब वह इसे 16 मार्च से पहले सब्मिट करेंगे।
हयातनगर गांव में 2700 से ज्यादा लोग रहते हैं। यहां 450 वर्गफीट मीटर घोसिया नाम की मस्जिद है। प्रशासन के मुताबिक, जमीन का गाटा नंबर 291 है। डॉक्यूमेंट्स में यह जमीन मोहन सिंह और भूराज सिंह पुत्र सुखी सिंह के नाम पर है।




