–महाधिवक्ता कार्यालय में रिक्त पदों को न भरने का मामला
प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि त्वरित न्याय चाहिए तो सिस्टम तैयार करना होगा। वर्षों से राज्य विधि कार्यालय में तृतीय व चतुर्थ स्टाफ के खाली पदों को भरने की कार्यवाही नहीं की है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद महाधिवक्ता द्वारा भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई। यदि सिस्टम पंगु रहेगा तो मुकद्दमों के निस्तारण में सहयोग न मिलने से न्याय व्यवस्था विफल होगी ही।
कोर्ट ने राज्य सरकार या महाधिवक्ता से स्टाफ के खाली पदों के भरने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दे। राज्य सरकार के सचिव हलफनामा दाखिल करें, यदि ऐसा नहीं हुआ तो कोर्ट कड़ा रुख अपनायेगी। याचिका की अगली सुनवाई की तिथि 16 मार्च नियत की है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार तथा न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने सूबेदार यादव की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
याचिका की सुनवाई शुरू हुई तो सरकारी वकील द्वारा बताया गया कि मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी है। इस पर कोर्ट ने जिलाधिकारी को तलब करना चाहा तो अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ता पी के साही ने बताया कि जानकारी उनके फोन के वाट्सएप पर मिली है किन्तु डाउनलोड न हो पाने के कारण वह देख नहीं सके। जिस पर कोर्ट ने जिलाधिकारी को तलब नहीं किया।
कोर्ट ने कहा अकसर देखा गया है कि अधिकारियों द्वारा समय से जानकारी नहीं दी जाती जिसके कारण केस की सुनवाई बाधित होती है। सरकारी वकीलों को भी समय से फाइल नहीं मिल पाती जिसके कारण वे अपडेट नहीं हो पाते। न्याय प्रशासन में असुविधा होती है।
अपर महाधिवक्ता अमित सक्सेना व मुख्य स्थाई अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार के विधि अधिकारी कार्यालय में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की कमी है। वर्षों से खाली पदों को भरा नहीं गया। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप पर महाधिवक्ता ने भर्ती कार्यवाही शुरू की है।
कोर्ट ने कहा, अदालत के मामले को प्राथमिकता देनी चाहिए, केस के निस्तारण में बेंच बार दोनों की भूमिका होती है। सुनवाई में सहयोग न मिल पाना न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करना है।




