दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायिक कार्यों के बहिष्कार का असर, सभी मामलों की सुनवाई टली

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नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय में शनिवार को न्यायिक कार्यों के बहिष्कार के हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के आह्वान का काफी असर देखने को मिला। आज उच्च न्यायालय में लिस्टेड करीब-करीब सभी मामलों में सुनवाई टल गई। मामलों से जुड़े मुख्य वकीलों के पेश नहीं होने की वजह से सुनवाई टाली गई।

आज सुबह मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की बेंच समेत कई बेंच सुनवाई के लिए बैठी ही नहीं और मामलों की सुनवाई टाली गई। जस्टिस अनूप जयराम भांभानी की बेंच के समक्ष आज एक मामला लिस्ट हुआ था, जिसमें मुख्य वकील दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एन हरिहरन को पेश होना था। जब जस्टिस भांभानी को बताया गया कि शनिवार की कोर्ट के न्यायिक बहिष्कार का फैसला किया गया है तो जस्टिस भांभानी ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि मुझे उम्मीद थी कि हरिहरन पेश होंगे।

दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने 2 अप्रैल को जारी नोटिस में महीने के पहले और तीसरे शनिवार को न्यायिक कार्यों के बहिष्कार का आह्वान किया था। नोटिस में बार एसोसिएशन की ओर से सर्वसम्मति से कहा गया था कि 4 अप्रैल से न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया जाएगा। बार एसोसिएशन ने कहा था कि उच्च न्यायालय के प्रशासन को कई बार इस संबंध में प्रतिवेदन देकर अनुरोध किया गया कि शनिवार को न्यायिक कार्य अनिवार्य रुप से करने के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए लेकिन इस पर उच्च न्यायालय प्रशासन ने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया।

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बार एसोसिएशन ने कहा कि कार्यकारिणी को वकीलों की ओर से शिकायतें मिल रही थीं कि शनिवार को कोर्ट के चलते रहने से व्यावहारिक परेशानियां उत्पन्न हो रही हैं। इससे वकीलों का प्रोफेशनल शेड्यूल बिगड़ गया है। वकील विभिन्न ट्रिब्यूनल्स, आर्बिट्रेशन, मध्यस्थता और दिल्ली के बार के कोर्ट का काम नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा वकीलों को केस की तैयारी के लिए समय और मुवक्किल के साथ मीटिंग में भी दिक्कतें आ रही हैं। कुल मिलाकर वकीलों को अपने प्रोफेशनल दक्षता में परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 15 जनवरी को नोटिफिकेशन जारी किया, जिसमें कहा गया था कि हर महीने के पहले और तीसरे शनिवार को कोर्ट न्यायिक कार्य करेगी। इसके पहले उच्च न्यायालय में कुछ अपवादों को छोड़कर शनिवार को न्यायिक कार्य नहीं होते थे यानि कोर्ट में सुनवाई नहीं होती थी

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