जयपुर। सीबीआई मामलों के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने फर्जी फर्मो का गठन कर विजया बैंक से लोन लेने के 25 साल पुराने मामले में अभियुक्त आलोक कुमार अग्रवाल को सात साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने अभियुक्त पर पचास हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। प्रकरण में अदालत ने अभियुक्त के भाई अरुण अग्रवाल को दोषमुक्त कर दिया है। वहीं सुनवाई के दौरान अभियुक्त के पिता सांवरमल की मौत हो चुकी है।
पीठासीन अधिकारी जया अग्रवाल ने अपने आदेश में कहा कि जांच अधिकारी ने फर्जी फर्मो के खाता खोलने के प्रार्थना पत्र तक एकत्रित करने का प्रयास नहीं किया। जांच अधिकारी ने प्रार्थना पत्र व केवाईसी दस्तावेजों को जांच के दायरे से बाहर रखा, जबकि वह जानता था कि ये प्रार्थना पत्र ही मुख्य साक्ष्य होते हैं, जो बैंककर्मियों की मिलीभगत को उजागर करते हैं। ऐसे में सीबीआई निदेशक को निर्देश दिए जाते हैं कि वह प्रकरण के मुख्य अनुसंधान अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करे।
अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अनिरुद्ध दाधीच ने बताया कि मामले में विजया बैंक, जयपुर में दस फर्मो के नाम से विजया बैंक में खाते खोले गए, जबकि इन फर्मो का कोई अस्तित्व ही नहीं था। इन खातों के जरिए विजया बैंक को करीब पांच करोड रुपये की हानि पहुंचाई गई थी। प्रकरण में गुप्त सूचना पर सीबीआई ने मामला दर्ज कर साल 2001 और साल 2002 में विशेष न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया था।




