उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन से नौकरी हड़पने के लिए कितनो ने राजस्व कर्मचारियों से मिलकर बदली जातिया ? का खुलासा जल्द

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मऊ । उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन से चयनित कई लोगो के द्वारा कूट रचित दस्तावेजो के आधार पर राजस्व कर्मचारियों को अपनी आपराधिक साजिस में लेकर बनवाये गए गैर विरादरी के फर्जी जाति प्रमाण पत्रों को चयन का आधार बनवाये जाने की खबर है । कितने लोगो ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे एसटी विरादरी के आरक्षण का लाभ लिया है? उन तक खरी दुनिया की टीम पहुंच चुकी है । टीम सरकारी अभिलेखों की प्रमाणित कॉपी को प्राप्त करने के बाद उन चयनित लोगो के नाम का खुलासा करेगी।

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से चयनित उम्मीदवारों में आधा दर्जन से अधिक लोग जनपद देवरिया, बलिया से ऐसे जाति प्रमाण पत्रों के आधार पर चयन पाया है जो उनकी मूल विरादरी के बिपरीत बना हुआ है। चयन पाने वाले लोगो ने कूट रचित दस्तावेजो के माध्यम से राजस्व कर्मचारियों को अपनी साजिस में लेकर अनुसूचित जन जाति के फर्जी प्रमाण पत्र बनवा कर जानबूझकर सरकारी अभिलेखों में लगा और लगवाकर नौकरिया हड़प ली है ।

किन- किन लोगो ने अनुसूचित जनजाती को मिले आरक्षण का लाभ लेने के लिए अपनी जाति बदली है , के खुलासे के लिए खरी दुनिया ने प्रमाण पत्र जारी करने वाले के दफ्तर से लेकर चयनित उम्मीदवारों की जातियों को प्रमाणित करने वाले तथ्यों के संकलन में आवेदन दाखिल कर दिया है। चयनित उम्मीदवारों की जातीय कुछ है और उनके पिता, पितामह आदी की जातीय सरकारी अभिलेखों में कुछ है ।

1950 में एसटी में गोंड सहित ५ उपजातियो के लिए जारी हुआ था आरक्षण का राजज्ञा 

सोनभद्र, मिर्ज़ापुर और कुमायु मण्डलो के गोंड विरादरी के विकास के लिए सरकार ने राजज्ञा जारी की थी । इसी राजज्ञा के अनुसार आरक्षण का लाभ लेने के लिए पिछडी जाति के अधिकांश गोड़ विरादरी के लोगो ने कूट रचित दस्तावेजो के आधार पर राजस्व कर्मचारियों से मिलकर अनुसूचित जनजाती के गोंड विरादरी का फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवा कर सरकारी नौकारियों का लाभ लिया है और ले रहे है ।

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प्रमाण पत्रों के निर्गमन में राजस्व विभाग पर मनमानी का आरोप 

राजस्व विभाग के द्वारा जाति प्रमाण पत्रों के निर्गमन में “माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा माधुरी पाटिल बनाम उत्तर प्रदेश सरकार में वर्ष 1994 में”  पारित आदेश का पालन किये बिना जाति प्रमाण पत्र जारी करने का आरोप लग रहा है। मूल आदिवासी कल्याण सस्था इस संदर्भ में पत्राचार कर चुकी है।

ऐसे करेंगी खुलासा

चयनित उम्मीदवारों और उनके पिता, पितामह आदि के जाति संबंधित प्रमाणको के साथ प्रदेश के 17 जनपदो में हों रहे खेल का खरी दुनिया खुलासा करेंगी। उअत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के हालिया परिणाम में देवरिया और बलिया सहित कई जिलो के अधिकांश ओबीसी के ब्यक्तियो के द्वारा राजस्व कर्मचारियों को साजिस में लेकर कूट रचित दस्तावेजो के माध्यम से अनुसूचित जन जाति के फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के बल पर चयन कराने में सफलता हासिल की गई है| इस अपराधिक कृत्य के खुलासे के लिए खरी दुनिया ने चयनित उम्मीदवारों और उनके पिता और पितामह आदि के ओबीसी के जाति में होने के प्रमाण को सरकारी दस्तावेजो में खंगालने का कार्य किया जा रहा है | साक्ष्य के मिलते ही साक्ष्यो के साथ खुलासा किया जायेगा |

कमीशन ने केवल निर्गमन का सत्यापन किया है न की प्रमाण पत्रों की आधार का!

चयन के पूर्व अभ्यर्थीयो के द्वारा उपलब्ध कराये गए जाति प्रमाण पत्रों का संबंधित कार्यालय से निर्गमन की ही जांच की गई है । जारी “प्रमाण पत्र ” के आधार आदि की जाँच नहीं की गई है। एसटी के उम्मीदवारों ने जो जाति प्रमाण पत्र कमिशन को उपलब्ध करवाये है उनमे से अधिकांश का निर्गमन, उनके द्वारा कूट रचित दस्तावेजो की माध्यम से राजस्व कर्मचारियों को साजिस में लेकर फर्जी तरीके से बनवाये गए है ।

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