👉 मधुबन तहसील के सुल्तानपुर बड़गांवा का मामला, दोनों पक्ष के आबादी जमीन पर कब्जे का विवाद अब थाने में
मऊ । तहसील मधुबन के एक लेखपाल और कानूनगो के द्वारा पदीय अधिकारों का दुरूपयोग करते हुए नौ साल पहले हुए पट्टे को दूसरे के नाम अबटित किये जाने की खबर है। पूर्व में हुए पट्टे में शामिल उस समय के लेखपाल और वर्तमान में राजस्व निरीक्षक बने कारकून के इस अविधिपूर्ण कार्रवाई की उपजिलाधिकारी तक को जानकारी नहीं हुई। उपजिलाधिकारी ने खरी दुनिया से बताचीत में इस एबंतन को अविधिपूर्ण मानते हुए पट्टे को निरस्त करने की बात कही है ।
विभागीय सूत्रों के अनुसार मधुबन तहसील के सुल्तानपुर बड़गांवा में ग्राम पंचायत की अनुसूचित जनजाति के नाम पर आबादी जमीन पर हक को लेकर दो पक्ष एक दूसरे के सामने आ गए हैं। इसमें एक पक्ष ने 2016 में यह जमीन खुद के साथ छह लोगों के नाम पर पट्टा करने की बात कह रहा हैं तो दूसरा पक्ष बीते जनवरी माह में पट्टा होने का दावा कर रहा है।चौकाने वाली बात है कि यह पट्टा नौ साल पहले जिस लेखपाल ने किया, वहीं वर्तमान में उसके द्वारा राजस्व निरीक्षक के पद पर रहते हुए दुबारा पट्टा किया गया है। उधर इस मामले में संज्ञान में न होने की बात कह रहे हैं।
जानकारी के अनुसार मधुबन तहसील के सुल्तानपुर बड़गांवा निवासी रामदीन पुत्र रामनाथ ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि 2016 में तत्तकालीन लेखपाल महेंद्र गुप्ता ने गांव में एक सरकारी आबादी जमीन अनूसूचित जाति के नाम पर उसके सहित छह अन्य लोगों के लिए पट्टा किया था।आरोप लगाया कि अब उसकी जमीन पर नगर पंचायत मधुबन के गांगेवीर निवासी रामप्रवेश पुत्र शामराज राम द्वारा बीते 14 जनवरी 2026 में अपने नाम पर यह जमीन पट्टा करने की बात कहकर कब्जा करने का प्रयास कर रहा है।वहीं मधुबन नगर पंचायत के गांगेववीर निवासी रामप्रवेश ने बताया कि उसे यह जमीन 14 जनवरी 2026 को आवंटित किया गया है।
चौकाने वाली बात है कि नौ साल पहले जिस जमीन को सुल्तानपुर बड़गांवा में अनुसूचित जाति के नाम पर जिस लेखपाल महेंद्र गुप्ता ने रामदीन सहित अन्य को आंवटित किया गया था। वर्तमान में वहीं राजस्व निरीक्षक पद के हैसियत से यह जमीन नगर पंचायत के गांगेवीर निवासी को जारी कर दिया गया है।उधर एक ही जमीन को नियम के खिलाफ जाकर पट्टा करने के बाद रामदीन और रामप्रवेश के बीच विवाद गहरा गया, जिससे यह मामला मधुबन थाने में पहुंच गया है।
इसको लेकर थाना प्रभारी राजीव सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में है, जांच की जा रही है। वहीं इसको लेकर एसडीएम सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अनुसूचित जाती का पट्टा होने के बाद बिना निरस्त हुए इसे दुबारा कैसे दुबारा किसी ग्रामीण को जारी कर दिया गया है। इसकी जांच कराई जाएगी।




