मप्र में सबसे पहले सिंगरौली में दिखा चंद्रग्रहण, शुद्धिकरण के बाद मंदिरों के पट खुले

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भोपाल। फाल्गुन पूर्णिमा के मौके पर मंगलवार को चंद्रग्रहण की खगोलीय मध्य प्रदेश में सबसे पहले सिंगरौली में देखी गई। शाम 6.48 बजे चंद्रग्रहण खत्म होने के बाद मंदिरों को धोया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिरों के कपाट खोल दिए गए।

मप्र की नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू के अनुसार, साल 2026 का पहला चंद्रग्रहण मंगलवार दोपहर 3.21 बजे शुरू होकर शाम 6.47 बजे तक रहा। मध्य प्रदेश में यह सबसे पहले सिंगरौली में 6 बजकर एक मिनट पर दिखा। पूर्णग्रहण की कुल अवधि 58 मिनट रही, लेकिन भारत में चंद्रोदय के समय तक इसका ज्यादातर हिस्सा बीत चुका था। मध्य प्रदेश के पूर्वी जिलों में चंद्रग्रहण करीब 40 से 45 मिनट तक दिखा, जबकि पश्चिमी जिलों में यह अवधि करीब 10 मिनट के आसपास रही।

राजधानी भोपाल में चंद्रग्रहण शाम 6 बजकर 24 मिनट पर दिखाई दिया। विज्ञान प्रसारिका सारिका घारू ने चंद्रग्रहण को टेलिस्कोप के माध्यम से दिखाया और इसके वैज्ञानिक तथ्यों को समझाया। उन्होंने बताया कि सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आने से यह खगोलीय घटना होती है, जिसे बिना किसी चश्मे के आंखों से देखना पूरी तरह सुरक्षित है। टेलिस्कोप से इसका नजारा और भी स्पष्ट दिखता है।

चंद्रग्रहण के समय चंद्रमा पृथ्वी से लगभग 3 लाख 80 हजार किलोमीटर दूर था और पृथ्वी की छाया के कारण चंद्रमा ब्लड मून के रूप में तांबिया लाल रंग का दिखाई पड़ रहा था। विज्ञान प्रसारक सारिका के अनुसार, चंद्रमा पृथ्वी की पूर्ण छाया से होकर गुजरा। इस दौरान पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य की नीली रोशनी को बिखेर देता है और केवल लाल प्रकाश चंद्रमा तक पहुंचता है। इसी कारण पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान चंद्रमा तांबे या गहरे लाल रंग का दिखाई देता है, जिसे ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है।

इधर, चंद्रग्रहण समाप्ति के साथ ही सूतक खत्म होने के बाद प्रदेशभर के मंदिरों में साफ-सफाई की गई। जल शुद्धिकरण के बाद मंदिरों के पट खोले गए। पूजा-पाठ की गई। उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर के मंदिर में शिखर के जल शुद्दिकरण के बाद बाबा महाकाल को स्नान कराया गया। शृंगार के बाद भोग लगाया गया। पुजारी ने बताया कि ग्रहणकाल में पुजारियों ने देश-प्रदेश के लिए मंगल कामना की।

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वहीं, इंदौर के रणजीत हनुमान मंदिर में भी सफाई कर भगवान को स्नान कराया गया। शृंगार और पूजा के बाद भक्तों को मंदिर में प्रवेश दिया गया। इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में शुद्धिकरण के बाद गजानन का दुग्ध अभिषेक किया गया। शाजापुर में भी चंद्रग्रहण खत्म होने के बाद सभी मंदिरों में विशेष साफ-सफाई की गई। पुजारियों और समिति सदस्यों ने मंदिर परिसर को पानी से धोकर स्वच्छ किया। इसके बाद गंगाजल का छिड़काव कर शुद्धिकरण किया गया। शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना और महाआरती संपन्न हुई। फिर श्रद्धालुओं के लिए मंदिरों के पट खोल दिए गए।

ग्वालियर में भी चंद्र ग्रहण की समाप्ति और सूतक काल खत्म होते ही प्रमुख मंदिरों में साफ-सफाई और शुद्धिकरण किया गया। शहर के प्रमुख सनातन धर्म मंदिर में सबसे पहले विधिवत साफ-सफाई की गई। मंदिर परिसर की धुलाई कर गंगाजल से शुद्धिकरण किया गया। इसके बाद मंदिर के पट खोले गए और नियमित पूजा-अर्चना प्रारंभ हुई। जैसे ही दर्शन शुरू हुए, श्रद्धालुओं की कतारें लग गईं। इसी तरह अचलेश्वर महादेव मंदिर में भी सेवादारों ने पूरे प्रांगण की सफाई कर गंगाजल से छिड़काव किया। भगवान अचलनाथ का शहद, दूध, घी, दही और पंचामृत से अभिषेक किया गया। अभिषेक के बाद भगवान का विशेष श्रृंगार किया जा रहा है। मंदिर के बाहर श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए धैर्यपूर्वक इंतजार करते नजर आए।

वहीं कोटेश्वर मंदिर में भी विधि-विधान से बाबा का अभिषेक कर मंदिर को भक्तों के लिए खोल दिया गया। ग्रहण के बाद मंदिरों में धार्मिक उल्लास का माहौल देखने को मिल रहा है। श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं और सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

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