नेपाल में जेन-जी आंदोलन पर जांच आयोग की रिपोर्ट कार्की कैबिनेट में पेश करने की तैयारी

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काठमांडू। नेपाल में पिछले साल 8–9 सितंबर को हुए जेन-जी आंदोलन की जांच के लिए गठित उच्चस्तरीय आयोग की रिपोर्ट जल्द ही मंत्रिपरिषद की बैठक में पेश की जाएगी। यह रिपोर्ट कैबिनेट की बैठक के एजेंडे में शामिल की गई है। इसके साथ ही आयोग की सिफारिशों को लागू करने पर भी उसी दिन निर्णय लिया जा सकता है।

प्रधानमंत्री के प्रमुख सलाहकार अजय भद्र खनाल के अनुसार अब इस रिपोर्ट को औपचारिक रूप से मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। रिपोर्ट पेश होने के साथ ही सरकार आयोग द्वारा दी गई सिफारिशों पर निर्णय लेने की तैयारी में है। उनका कहना है कि कैबिनेट बैठक बुधवार या गुरुवार को हो सकती है। इस बैठक में रिपोर्ट की मुख्य सिफारिशें, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर चर्चा होने की संभावना है।

जेन-जी आंदोलन के बाद बनी अंतरिम सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए उच्चस्तरीय आयोग का गठन किया था। उस समय देश में व्यापक विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी थी। इसी सरकार ने पूर्व न्यायाधीश गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया था, जिसका मुख्य उद्देश्य सितंबर 2025 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा, जनहानि, सरकारी कार्रवाई और प्रशासनिक निर्णयों की विस्तृत जांच करना था।

आयोग ने कई महीनों तक घटनाओं की जांच करने, सुरक्षा एजेंसियों, सरकारी अधिकारियों, आंदोलन से जुड़े लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज करने के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार की। यह रिपोर्ट पहले ही प्रधानमंत्री कार्की को सौंप दी गई है। प्रधानमंत्री के प्रमुख सलाहकार ने कहा कि सरकार आयोग की रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया नई सरकार बनने से पहले ही शुरू करना चाहती है।

हाल ही में हुए चुनाव के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया जारी है, लेकिन अंतरिम सरकार चाहती है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर कार्रवाई में देरी न हो। इसी कारण प्रशासनिक स्तर पर प्रारंभिक तैयारियां पहले से शुरू कर दी गई हैं। सरकारी अधिकारियों के अनुसार प्रधानमंत्री सुशीला कार्की स्वयं इस रिपोर्ट का अध्ययन कर रही हैं। इसके अलावा कई वरिष्ठ मंत्री भी रिपोर्ट की सामग्री और सिफारिशों की समीक्षा में जुटे हुए हैं।

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रिपोर्ट में आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं, सुरक्षा बलों की कार्रवाई, सरकारी निर्णयों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का विस्तृत विश्लेषण शामिल किया गया है।

अधिकारियों के अनुसार यदि सरकार आयोग की सिफारिशों को लागू करने का निर्णय लेती है, तो इसके कार्यान्वयन की प्रक्रिया में वर्तमान में निर्वाचित सांसदों की भी भूमिका हो सकती है। इसका अर्थ यह है कि संसद के माध्यम से कानूनी या नीतिगत सुधारों की आवश्यकता पड़ने पर नए सांसदों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।

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