तलाक के मामले में विदेश से वर्चुअल गवाही को हाईकोर्ट की मंजूरी

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जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने आपसी सहमति से तलाक चाहने वाले पति-पत्नी को कानूनी राहत दी है। कोर्ट ने अमेरिका और आयरलैंड में अलग-अलग रह रहे पति-पत्नी को भारतीय दूतावास जाए बिना अपने-अपने घर से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के जरिए बयान दर्ज कराने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही फैमिली कोर्ट का वह आदेश भी निरस्त कर दिया है, जिसमें वीसी के लिए दूतावास के अधिकारी की अनिवार्यता बताई गई थी। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने फैसला सुनाया है।

मामले में आयरलैंड में रहने वाली महिला और उनके अमेरिका निवासी पति ने फैमिली कोर्ट नंबर तीन जोधपुर में हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से तलाक का मुकदमा दायर कर रखा है। दोनों ने कोर्ट में संयुक्त अर्जी पेश कर अपने-अपने निवास स्थान से वीसी के जरिए साक्ष्य दर्ज करवाने की अनुमति मांगी थी। फैमिली कोर्ट ने चार फरवरी को यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी थी कि राजस्थान हाईकोर्ट वीसी रूल्स 2020 के नियम 5.1 और 5.3.1 के तहत विदेशों से वीसी के लिए भारतीय दूतावास या उच्चायोग के अधिकारी का रिमोट पॉइंट समन्वयक (कॉर्डिनेटर) के रूप में उपस्थित होना जरूरी है। इस पर हाईकोर्ट में महिला के वकील और पावर ऑफ अटॉर्नी धारक पिता ने पक्ष रखा। वहीं प्रतिवादी पति की ओर से वकील के साथ उनके पिता उपस्थित हुए। वकीलों ने खंडपीठ के सामने तर्क दिया कि आयरलैंड व अमेरिका के बीच और भारत के साथ भारी टाइम जोन अंतर है। ऐसे में भारतीय कोर्ट के समय के अनुसार दोनों का एक साथ अपने-अपने दूतावास में उपस्थित होना व्यावहारिक रूप से असंभव है। उन्होंने दलील दी कि न्याय प्रक्रिया का उद्देश्य न्याय दिलाना है और अत्यधिक तकनीकी नियमों को आधार बनाकर पक्षकारों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि वीसी नियमों के तहत समन्वयक की अनिवार्यता मुख्य रूप से गवाह या आरोपित की परीक्षा के समय होती है। कोर्ट ने नियम 8.15 का हवाला देते हुए कहा कि यदि समन्वयक उपलब्ध न हो या कोई व्यक्ति कोर्ट या रिमोट पॉइंट तक पहुंचने में असमर्थ हो, तो कोर्ट उसे उसके स्थान से ही वीसी की अनुमति दे सकता है। कोर्ट ने दोनों को अपने घर से वीसी करने और अपने पिताओं (पीओए धारकों) के माध्यम से पैरवी की अनुमति दे दी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि पहचान सुनिश्चित करने के लिए फैमिली कोर्ट दूतावास से अटेस्टेड शपथ पत्र मांगने जैसी उचित शर्तें लगा सकती है।

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