मुख्य सचिव शपथ पत्र पेश कर बताए स्कूल भवनों के निर्माण और मरम्मत की क्या है कार्य योजना-हाईकोर्ट

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जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों से जुडे मामले में मुख्य सचिव को शपथ पत्र पेश करने को कहा है। अदालत ने मुख्य सचिव को कहा है कि वे 19 मार्च को शपथ पत्र पेश कर बताए कि स्कूलों के निर्माण और मरम्मत की क्या कार्य योजना है। अदालत ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि क्या हम यह आदेश पारित कर दें कि आगामी सत्र से केवल उन्हीं स्कूलों में कक्षाएं संचालित की जाए, जिनके भवनों को चार्टेड इंजीनियर सही माने। जस्टिस महेन्द्र गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने यह आदेश झालावाड स्कूल हादसे के बाद लिए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए दिए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि अभी भी हालात नहीं सुधरे तो हम आगामी जुलाई माह के बाद केवल अस्पताल और स्कूल इमारत बनाने के अलावा अन्य किसी भी नए निर्माण की अनुमति नहीं देंगे। अदालत ने कहा कि यह देखना हमारा काम नहीं है कि राज्य सरकार को पैसा कहां से मिलेगा। राज्य सरकार बाध्य है कि वह प्रदेश में स्कूली बच्चों को सुरक्षित और पर्याप्त संसाधन मुहैया कराए। अदालत ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार बच्चे अभी भी गंदी जगहों पर पढ रहे हैं। प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार भरतपुर में बीस साल पुरानी बिल्डिंग में दरारें आ गई थी। अदालत ने कहा कि आंधी-तूफान की वजह से स्कूल भवनों में दरारें आ जाती है, निर्माण के दौरान क्या इन भवनों को तय मापदंड नहीं अपनाए जाते। पूर्व में शिक्षा सचिव ने शपथ पत्र पेश कर कहा था कि कोई भी पुरानी इमारत काम में नहीं ली जा रही, फिर ऐसी घटनाएं कैसे हो रही हैं। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार को देखना चाहिए कि कोई भी स्कूल दो मंजिल से ऊंची नहीं हो और छोटे बच्चों की कक्षाएं ग्राउंड फ्लोर पर ही हो। अदालत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि कई माह बीतने के बाद भी केवल आधा दर्जन स्कूलों में ही मरम्मत का काम शुरू हुआ है।

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