डोपिंग मामलों में भारत सबसे ऊपर, एआईयू की सूची में केन्या को पीछे छोड़ा

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नई दिल्ली। एथलेटिक्स में डोपिंग के मामलों को लेकर भारत के लिए चिंताजनक खबर सामने आई है। एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट (एआईयू) की ताजा सूची के अनुसार, डोपिंग उल्लंघनों के कारण अयोग्य घोषित खिलाड़ियों की संख्या में भारत ने केन्या को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल कर लिया है। भारत में इस समय 148 ट्रैक एंड फील्ड एथलीट निलंबित हैं, जो केन्या से दो अधिक हैं। वहीं, रूस 66 निलंबित खिलाड़ियों के साथ तीसरे स्थान पर है।

इस सूची में भारत के कई प्रमुख एथलीट भी शामिल हैं। इनमें महिला 100 मीटर राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक दूती चंद, जो दिसंबर 2022 से चार साल के प्रतिबंध का सामना कर रही हैं, मध्य दूरी के धावक परवेज खान, जिनका छह साल का प्रतिबंध जुलाई 2030 तक चलेगा, और तमिलनाडु की स्प्रिंटर सेकर धनलक्ष्मी, जिन्हें 2025 में आठ साल के लिए निलंबित किया गया, प्रमुख नाम हैं।

एआईयू की इस सूची में केवल डोपिंग मामलों में दोषी पाए गए खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि वे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने टेस्टिंग से बचने, सैंपल में छेड़छाड़, तस्करी या अपनी लोकेशन की जानकारी नहीं देने जैसे गैर-डोपिंग उल्लंघन किए हैं। इन सभी मामलों में भी डोपिंग जैसी ही सख्त सजा दी जाती है।

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एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट, वर्ल्ड एथलेटिक्स द्वारा स्थापित एक स्वतंत्र एंटी-डोपिंग संस्था है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों और उनके सहयोगियों पर निगरानी रखती है।

डोपिंग की समस्या से निपटने के लिए एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफआई) ने सख्त कदम उठाए हैं। फेडरेशन देश में उन ट्रेनिंग सेंटर्स की पहचान कर रहा है, जो डोपिंग गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा, एएफआई ने सभी कोचों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। बिना रजिस्ट्रेशन वाले कोचों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और उनके खिलाड़ियों को राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए अयोग्य माना जाएगा।

पेरिस ओलंपिक 2024 के बाद एएफआई ने राष्ट्रीय कैंपों को विकेंद्रीकृत कर दिया है। फिलहाल केवल रिले टीमों के लिए ही राष्ट्रीय कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। अन्य शीर्ष एथलीट अब रिलायंस, जेएसडब्ल्यू, टाटा जैसी निजी संस्थाओं या सेना और नौसेना जैसे सरकारी विभागों के साथ प्रशिक्षण ले रहे हैं।

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