( ब्रह्मा नन्द पाण्डेय )
प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने संभल के शाही जामा मस्जिद से जुड़े क़ब्रिस्तान की भूमि से बेदख़ल करने के संभल जिला प्रशासन के नोटिस पर रोक लगा दी है हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को मौक़े पर यथास्थिति क़ायम रखने का निर्देश दिया है। 1 जनवरी 2०26 को जारी संभल प्रशासन के नोटिस पर रोक लगाते हुए हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब माँगा है।
यह आदेश जस्टिस जस्टिस मनीष कुमार निगम ने अली अशरफ द्वारा दाख़िल याचिका पर पारित किया है। याचिका दाख़िल का अधिवक्ता अरविंद कुमार त्रिपाठी एवं शशांक श्रीत्रिपाठी का कहना था कि प्रशासन ने बिना विवेक का इस्तेमाल किए यह नोटिस जारी की है। उनका कहना था कि नोटिस किस प्रावधान में जारी किया गया है, इसका कोई उल्लेख नहीं है। कहा कि क़ब्रिस्तान के एक हिस्से को बिना किसी आदेश के आबादी घोषित कर हिंदुओं की आबादी बताया गया है, जबकि दूसरे हिस्से को जो क़ब्रिस्तान है उसे क़ब्ज़ा बताकर ख़ाली कराने को कहा गया है।
अधिवक्ता त्रिपाठी का कहना था कि इसके पूर्व ३१ दिसम्बर २५ को इसी कब्रिस्तान को लेकर जो कल्कि सेना ने शिकायत की थी, उस पर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने याची के पक्ष में आदेश दिया था और कहा था कि सभी पक्ष की उपस्थिति में मौक़े की पैमाइश करके निर्णय लिया जाय। कहा गया कि पक्षकारों को सुनकर प्रशासन को इस मामले में निर्णय लेना था, परंतु ऐसा न कर कोर्ट के आदेश की अनदेखी कर अगले ही दिन 1 जनवरी २६ को क़ब्रिस्तान की भूमि ख़ाली कराने की नोटिस दे दी गई है।
हाईकोर्ट ने प्रशासन द्वारा जारी नोटिस पर रोक लगाते हुए कहा कि प्रशासन का यह नोटिस बिना किसी प्रावधान का उल्लेख किए जारी किया गया है तथा हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के क्रम में बिना निर्णय लिए जल्दबाज़ी में किया गया है। हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए छह मई की तारीख़ नियत की है।




