
Stock Market view : PMS AIF वर्ल्ड द्वारा आयोजित क्रिस्टल गेजिंग समिट में बोलते हुए सुनील सिंघानिया ने चुनिंदा स्मॉल और मिड-कैप कंपनियों में बेहतर मैक्रो ट्रेंड और मजबूत रिटर्न की संभावना का हवाला देते हुए बॉटम-अप स्टॉक सेलेक्शन रणनीति इस्तेमाल करने की सलाह दी है
Market view : सिंघानिया का कहना है कि स्मॉल कैप में इंडेक्स-लेवल प्राइस-टू-अर्निंग्स मल्टीपल्स पर निर्भर रहना सही नहीं होगा
Stock Market view : PMS AIF WORLD द्वारा आयोजित क्रिस्टल गेजिंग समिट में बोलते हुए, अबक्कस एसेट मैनेजर्स (Abakkus Asset Managers) के फाउंडर सुनील सिंघानी ने कहा कि कुछ खास फार्मा,इंजीनियरिंग,छोटी डिस्क्रिशनरी कंजम्प्शन कंपनिया और कुछ नए ज़माने की कंपनियां निवेश के नजरिए से काफी अच्छी लग रही हैं। सिंघानिया का मानना है कि 15-18 महीने के भारी उथल-पुथल के बाद भारतीय बाज़ार और खासकर स्मॉल कैप सेगमेंट एक अहम मोड़ पर पहुच रहा है। वह पिछले डेढ़ साल को “चुनौतियों का दौर” मानते हैं,जिसमें आर्थिक रफ़्तार धीमी रही,कॉर्पोरेट प्रॉफ़िट ग्रोथ में नरमी दिखी और जियोपॉलिटिकल तनाव हावी रहा।
यह करेक्शन 2020 और 2024 के बीच के चार साल के बहुत मज़बूत दौर के बाद देखने को मिला है। इस चार साल की अवधि में बाज़ार और खासकर छोटी कंपनियों ने बहुत ज़्यादा मुनाफ़ा कराया। सिंघानिया ने कहा,”रीसेंसी बायस (हाल की घटनाओं के आधार पर भविष्य का अनुमान) हमें यह भरोसा दिलाता है कि जब चीज़ें अच्छी चल रही होती हैं,तो वे आगे भी अच्छी चलती रहेंगी।” 2024 के मध्य से आखिर तक के दौर में कई स्टॉक अपने पुराने फंडामेंटल वैल्यूएशन से काफी बढ़त पर ट्रेड कर रहे थे। उनका कहना है कि महंगे वैल्यूएशन और अर्निंग में कमी के मेल ने करेक्शन के लिए माहौल तैयार किया।
इस करेक्शन में निवेश के अच्छे मौके
सिंघानिया को इस करेक्शन में निवेश के अच्छे मौके दिख रहे हैं। उनका कहना है कि 7 तिमाहियों की कमजोर अर्निंग के बाद दिसंबर तिमाही ने पॉजिटिव सरप्राइज दिया है। लार्ज-कैप की अर्निंग ग्रोथ लगभग 10–10.5 फीसदी रही है, जबकि मिड और स्मॉल कैप की ग्रोथ इंडेक्स के आधार पर 15 से 19 फीसद के बीच रही है।
मैक्रो सिग्नल भी हो रहे बेहतर
मैक्रो सिग्नल भी बेहतर हो रहे हैं। इनकम टैक्स में राहत,GST में बदलाव और रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया से लिक्विडिटी सपोर्ट जैसे सरकारी उपायों का असर इकोनॉमिक इंडिकेटर्स पर दिखने लगा है। टू-व्हीलर,ट्रैक्टर,कमर्शियल गाड़ियां,रिटेल कंजम्पशन और यहां तक कि स्टील और सीमेंट जैसे भारी इंडस्ट्री में भी रिकवरी के संकेत दिख रहे हैं। पावर कंजम्पशन ट्रेंड्स इकोनॉमिक ग्रोत की कहानी को और मज़बूत कर रहे हैं।
टैरिफ का डर काफी हद तक हुआ खत्म
उनका यह भी मानना है कि टैरिफ का डर भी अब काफी हद तक बीते समय की बात हो चुका है। जब मार्केट में सुधार होता है तो छोटी कंपनियां बेहतर परफॉर्म करती। खास बात यह है कि इन्वेस्टर्स ऐसे समय में एंट्री कर रहे हैं जब कई स्टॉक्स में पहले ही काफी गिरावट आ चुकी है। इससे छोटे-मझोले शेयरों में अल्फा रिटर्न(बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर रिटर्न) मिलने की संभावना बढ़ गई है।
बॉटम-अप स्टॉक सेलेक्शन रणनीति इस्तेमाल करने की सलाह
सिंघानिया का कहना है कि स्मॉल कैप में इंडेक्स-लेवल प्राइस-टू-अर्निंग्स मल्टीपल्स पर निर्भर रहना सही नहीं होगा। लार्ज-कैप इंडेक्स में स्टेबल,प्रॉफिटेबल कंपनियों का दबदबा होता है। इसके विपरीत स्मॉल-कैप इंडेक्स में नुकसान में चल रही फर्में शामिल होती हैं जो कुल वैल्यूएशन को बिगाड़ सकती हैं। इसको ध्यान में रखते हुए छोटे-मझोले शेयरों में बॉटम-अप स्टॉक सेलेक्शन रणनीति अपनाने की सलाह होगी।
अब कहां हो फोकस
उन्होंने आगे कहा भारत की GDP का पहला 1 ट्रिलियन डॉलर स्टील,सीमेंट और टेक्सटाइल जैसे कोर सेक्टर के दम पर आय। इसके बाद अगला फेज़,1 ट्रिलियन से 4 ट्रिलियन डॉल तक का रहा। प्राइवेट बैंकों,IT सर्विसेज़,फार्मा और कंजम्प्शन से खास योगदान मिला। अब जैसे-जैसे भारत 4 ट्रिलियन से 8 ट्रिलियन जॉलर की ओर बढ़ेगा,इसमें सबसे ज्यादा योगदान स्पेशलाइज़्ड इंजीनियरिंग,डिफेंस,खास केमिकल्स,फार्मा,EMS,AI-लिंक्ड बिज़नेस,प्लेटफॉर्म और एसेट और वेल्थ मैनेजमेंट फर्मों का होगा। इन सेक्टर में कई लीडर अभी भी काफ़ी छोटे हैं। इनमें से अच्छी संभावनाओं वाली कंपनियों पर फोकस रहना चाहिए।
HDFC बैंक,कोटक महिंद्रा बैंक,हिंदुस्तान यूनिलीवर और ITC जैसी पारंपरिक बड़ी कंपनियों ने कुछ हद तक स्केल की कमी की वजह से हाल के सालों में कम रिटर्न दिया है। सिंघानिया का सुझाव है कि भविष्य में पैसा बनने की संभावना अगली पीढ़ी की ग्रोथ कंपनियों में हो सकता है।
कुल मिला कर कहें तो सिंघानिया का कहना है कि भारी करेक्शन के बाद मिड और स्मॉलकैप सेगमेंट बेहतर स्थिति में दिख रहा है। जो इन्वेस्टर मीडियम-टर्म का निवेश नज़रिया रखते हैं उनके लिए कुछ छोटी और मीडियम साइज़ की कंपनियों में रिस्क-रिवॉर्ड ज़्यादा अच्छा लग रहा है।
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