नई दिल्ली। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति में चीफ जस्टिस की भूमिका खत्म करने के केंद्र सरकार के कानून पर रोक की मांग को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। उच्चतम न्यायालय में शुक्रवार काे ये मामला जैसे ही सुनवाई के लिए आया चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या मुझे इस मामले की सुनवाई करनी चाहिए। कोई कह सकता है कि ये हितों का टकराव है। मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को होगी।
सुनवाई के दौरान जब चीफ जस्टिस ने इस याचिका पर सुनवाई से खुद के हटने की बात कही तो याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि इस मामले को उस बेंच के समक्ष लिस्ट किया जाना चाहिए जिस बेंच में भविष्य के चीफ जस्टिस नहीं हों। तब चीफ जस्टिस ने इस राय पर हामी भरी कहा कि मैं भी यही सोच रहा था।
इस मामले में एडीआर के अलावा एक याचिका जया ठाकुर ने दायर की है। याचिका में चयन समिति में चीफ जस्टिस को भी रखने की मांग की गई है। इस मामले पर उच्चतम न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले कुछ वकीलों ने भी याचिका दायर कर रखी है। याचिका में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद केंद्र सरकार की ओर से लाए गए नए कानून को चुनौती देते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्तियों में देश के चीफ जस्टिस को भी पैनल में शामिल करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि चुनाव में पारदर्शिता लाने के मद्देनजर मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करने वाले पैनल में चीफ जस्टिस को भी शामिल किया जाना जरुरी है।
उच्चतम न्यायालय ने 2 मार्च, 2023 में अपने एक फैसले में कहा था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति करने वाले पैनल में चीफ जस्टिस को भी शामिल किया जाएगा। इसके बाद केंद्र सरकार ने इस फैसले पर एक नया कानून बनाकर नियुक्ति प्रक्रिया में चीफ जस्टिस के बजाय सरकार का एक कैबिनेट मंत्री शामिल कर दिया। सरकार ने 18 फरवरी को मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार के रिटायर होने के बाद ज्ञानेश कुमार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया है।




