जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती-2012 की मेरिट से जुडे मामले में राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह सुप्रीम कोर्ट की ओर से नमो नारायण के मामले में दिए फैसले के आधार पर याचिकाकर्ता का प्रकरण स्वीकार करें। अदालत ने इसके लिए याचिकाकर्ता को अपना अभ्यावेदन विभाग के समक्ष पेश करने को कहा है। जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह आदेश हनीफ की ओर से याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने साल 2012 में तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती निकाली थी। जिसकी लिखित परीक्षा के बाद कुछ अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई, लेकिन याचिकाकर्ता के कम अंक होने के कारण उसे नियुक्ति नहीं मिली। वहीं बाद में विवादित उत्तर कुंजी विवाद हाईकोर्ट आने पर अदालत ने संशोधित परिणाम जारी करने के आदेश दिए। जिसके चलते याचिकाकर्ता के अंक बढ गए, लेकिन दूसरी ओर कट ऑफ अंक भी अधिक हो गए और याचिकाकर्ता मेरिट में शामिल नहीं हो सका। इस पर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा गया कि काम कर रहे अभ्यर्थियों से अधिक अंक वालों को नियुक्ति दी जाए। जिस पर हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि खाली पदों के आधार पर तीन माह में नियुक्ति दी जाए। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की। जिसमें कोर्ट ने आदेश दिए कि पहली लिस्ट में नियुक्ति पा चुके अभ्यर्थियों से अधिक अंक वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाए। याचिकाकर्ता के अधिक अंक हैं। ऐसे में उसे नियुक्ति दी जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार याचिकाकर्ता का अभ्यावेदन स्वीकार करने को कहा है।




