बोगस कंपनियां बनाकर 250 करोड़ का ट्रांजैक्शन, कमिश्नरेट पुलिस ने गिरोह का किया भंडाफोड़

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कानपुर। जनपद की कमिश्नरेट पुलिस ने बोगस कंपनियां बनाकर करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए मंगलवार को खुलासा कर दिया। गिरोह ऋण दिलाने के नाम पर छात्रों, ई-रिक्शा चालकों और गरीब तबके के लोगों के दस्तावेज लेकर उनके नाम से फर्जी फर्में बनाकर करोड़ों रुपये क्लेम कर लेते थे। अब तक पुलिस की जांच में 38 बोगस कंपनियों में करीब ढाई सौ करोड़ का ट्रांजैक्शन प्रकाश में आया है। जल्द ही पुलिस जीएसटी के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का भी खुलासा करेगी।

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने प्रेस वार्ता कर जानकारी देते हुए बताया कि नजीराबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत आरके नगर में रहने वाले अनुराग वर्मा ने थाने में तहरीर देते हुए बताया था कि उन्होंने बहन की शादी के लिए लोन लेने के उद्देश्य से एक एजेंट को अपने आवश्यक दस्तावेज दिए थे। लोन तो नहीं हुआ लेकिन उनके कागजों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस ने साइबर सेल को जांच सौंपी। इसके उपरांत यह पता चला कि गिरोह ने उनके दस्तावेजों पर यशोदा नगर में पार्वती ट्रेडर्स के नाम से बोगस कंपनी बनाई और एचडीएफसी बैंक में फर्म के नाम पर अकाउंट भी खुलवा दिया था। सभी जगह पर जीएसटी से लेकर बैंक में शातिरों ने अपना मोबाइल नंबर दर्ज कराया था। फर्म के नाम पर करोड़ों का आईटीसी क्लेम करके जीएसटी चोरी कर राजस्व को चूना लगाया जा रहा था।

इसी तरह से जब जांच आगे बढ़ी तो यह भी सामने आया कि उन्नाव के इंदिरा नगर के रहने वाले ई-रिक्शा चालक मनोज गुप्ता के छोटे बेटे उज्जवल गुप्ता को भी मां की बीमारी का इलाज करवाने के नाम पर लोन करने के नाम पर दस्तावेज लिया गया था। उज्जवल के नाम पर भी बोगस कंपनी बनाकर एचडीएफसी बैंक में खाता खोले गए अकाउंट में 117 करोड़ का ट्रांजैक्शन भी किया गया। पुलिस ने जब ई रिक्शा चालक मनोज और उनके बेटे उज्जवल को हिरासत में लिया तो सभी के होश उड़ गए। अपने अकाउंट पर अरबों का ट्रांजैक्शन और करोड़ों की रकम होने पर उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था। पूछताछ के बाद खुलासा हुआ कि लोन के नाम पर दिए गए दस्तावेजों से शातिरों ने बोगस कंपनी बनाकर जीएसटी की चोरी की है। अभी तक की जांच में पुलिस को 38 कंपनियों में करीब ढाई सौ करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन मिला है।

वहीं पुलिस को मौके से 30 मोबाइल, फर्जी सिम कार्ड, 52 चाबियां, 12 फर्मों के साइन बोर्ड, विभिन्न फार्मो के पैकिंग दस्तावेज, 15 खातों की चेक बुक, दो मोहर, तीन सिग्नेचर चेक, दो स्कूटी, पांच एटीएम, रेंट एग्रीमेंट, फर्म पंजीकरण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण एवं अन्य महत्वपूर्ण अभिलेख प्राप्त हुए हैं।

वहीं इस पूरे प्रकरण में पुलिस ने तीन प्रमुख के बैंक खातों में करीब डेढ करोड़ रुपये की धनराशि को फ्रिज कराई है। इसके अलावा अन्य खातों और फर्मों की विस्तृत जांच भी की जा रही है। साथ ही पुलिस ने 12वीं पास कपिल मिश्रा और राज उर्फ अमरदीप को गिरफ्तार किया है। जबकि उनके गिरोह से जुड़े पांच सदस्य अभी भी फरार है। जिनकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।

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