उत्तर प्रदेश सरकार ने किया गोतस्करों का दमन, सलाखों के पीछे धकेले गए 35 हजार से अधिक आरोपित

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—13 हजार 793 आरोपितों पर गुंडा एक्ट, 178 पर एनएसए और 14,305 मामलों में गैंगस्टर के तहत की गई कार्रवाई

—आरोपितों की लगभग 83 करोड़ 32 लाख रुपये की संपत्ति जब्त

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में गोतस्करों और अवैध पशु वध के खिलाफ बेहद गंभीर है। सरकार ने गोकशी को पूरी तरह से रोकने के लिए वर्ष 2020 में गोवध निवारण कानून में संशोधन किया। जून-2020 में उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश जारी हुआ। इसके तहत अब तक प्रदेश भर में गोकशी के 14 हजार 182 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 35 हजार 924 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया।

गोकशी से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किए गए आरोपितों के खिलाफ केवल सामान्य मुकदमे ही नहीं दर्ज किए गए, बल्कि उनके विरुद्ध कड़े कानूनों के तहत भी कार्रवाई की गई। गोकशी के मामले में 35 हजार 924 आरोपितों में से 13 हजार 793 के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की गई, जबकि 178 आरोपितों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) की कार्रवाई की गई। इसके अलावा 14 हजार 305 मामलों में गैंगस्टर एक्ट के तहत कठोर कार्रवाई की गई है। इस दौरान प्रदेश में सक्रिय गोकशी से जुड़े नेटवर्क को ध्वस्त किया गया और आरोपितों की संपत्तियों की भी जांच की गई।

गोकशी के मामलों में केवल गिरफ्तारी तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रही, बल्कि आर्थिक स्तर पर भी अपराधियों पर प्रहार किया गया। गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत कार्रवाई करते हुए लगभग 83 करोड़ 32 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की गई। इसका उद्देश्य अपराध से अर्जित संपत्ति को जब्त करने से संगठित अपराधियों की आर्थिक ताकत कमजोर करना है ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों को पूरी तरह रोका जा सके।

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इतना ही नहीं कई मामलों में अवैध कमाई से खरीदी गई जमीन, वाहन और अन्य संपत्तियों को भी कुर्क किया है। योगी सरकार ने गोकशी पर नियंत्रण के लिए पुलिस की विशेष टीमों का गठन किया। विशेष टीमों द्वारा खुफिया निगरानी, जिलास्तरीय टास्क फोर्स और सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सतर्कता के जरिये गोकशी-गोतस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त किया गया। साथ ही प्रदेश के कई संवेदनशील जिलों में रात के समय पुलिस गश्त बढ़ाई गई। वहीं, पशु परिवहन से जुड़े मामलों की भी विशेष निगरानी की गई। उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि अवैध बूचड़खानों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए गए। योगी सरकार की सख्त कार्रवाई से प्रदेश में अवैध पशु वध से जुड़े मामलों में काफी कमी आई है और संगठित गिरोहों की गतिविधियों पर अंकुश लगा है।

उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश 2020 में नियमों को किया गया सख्त

– अध्यादेश के तहत प्रदेश में गोहत्या पर 10 साल कठोर कारावास की सजा

– 3 से 5 लाख तक जुर्माने का प्रावधान

– गोवंश के अंगभंग करने पर 7 साल की जेल व 3 लाख जुर्माना

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