लाल किला धमाका मामले में दाे आरोपिताें की एनआईए हिरासत पांच दिन और बढ़ी

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नई दिल्ली। पटियाला हाउस कोर्ट के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज पीतांबर दत्त ने लाल किला ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार दो आरोपितों की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) हिरासत पांच दिन के लिए और बढ़ा दी है। कोर्ट ने तुफैल अहमद भट्ट और जमीर अहमद अहंगर को एनआईए हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

शुक्रवार काे दोनों की एनआईए हिरासत खत्म हो रही थी, जिसके बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। 25 फरवरी को कोर्ट ने दोनों को आज तक की एनआईए हिरासत में भेजा था। 25 फरवरी को दोनों को जम्मू-कश्मीर की पुलिस दिल्ली में प्रोडक्शन वारंट पर लायी थी।

एनआईए के मुताबिक जमीर अहमद को उमर उन नबी, मुफ्ती इरफान और डॉक्टर अदील अहमद रतहर ने राइफल, पिस्तौल और जिंदा कारतूस उपलब्ध कराए थे। दोनों आरोपितों का संबंध आतंकी समूह अंसार गजवत-उल-हिंद से है। एनआईए के मुताबिक 10 नवंबर, 2025 को लाल किले के बाहर हुए कार बम विस्फोट की योजना उमर उन नबी ने बनाई थी। उमर उन नबी की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस ब्लास्ट में 15 लोगों की जान गई थी और करीब दो दर्जन लोग घायल हुए थे।

पटियाला हाउस कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए एनआईए को 45 दिनों का और समय दे दिया है। एनआईए ने इसकी जांच की समय सीमा 90 दिन और बढ़ाने की मांग की थी।

एनआईए ने आरोपित दानिश को श्रीनगर से गिरफ्तार किया था। दानिश ने ड्रोन में तकनीकी बदलाव किए थे और कार बम विस्फोट से पहले रॉकेट तैयार करने की कोशिश की। दानिश ने उमर उन नबी के साथ मिलकर पूरी साजिश को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई। राजनीति विज्ञान में स्नातक दानिश को आत्मघाती हमलावर बनाने के लिए उमर ने ब्रेनवाश किया। वह अक्टूबर, 2024 में कुलगाम की एक मस्जिद में डॉक्टर मॉड्यूल से मिलने को तैयार हुआ, जहां से उसे हरियाणा के फरीदाबाद में अल फलाह विश्वविद्यालय में रहने के लिए ले जाया गया।

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लाल किले के पास 10 नवंबर, 2025 को आई-10 कार में ब्लास्ट हुआ था। ये कार आमिर रशीद अली के नाम पर थी। इस ब्लास्ट में 13 लोगों की मौत हुई थी और 32 लोग घायल हो गए थे।

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