सुप्रीम कोर्ट ने तृणमल सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ लोकपाल की जांच पर रोक लगाई

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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने पैसे लेकर सवाल पूछने के मामले में तृणमल सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ लोकपाल की जांच पर रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में महुआ मोइत्रा और निशिकांत दुबे को नोटिस जारी किया है।

यह याचिका लोकपाल ने दायर करके दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद लोकपाल कानून के प्रावधानों को स्पष्ट करने की मांग की है। लोकपाल ने धारा 20 की व्याख्या की मांग की है।

दरअसल, दिल्ली उच्च न्यायालय ने 19 दिसंबर, 2025 को पैसे लेकर सवाल पूछने के मामले में महुआ मोइत्रा के खिलाफ सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने के लिए लोकपाल की अनुमति देने के आदेश को निरस्त कर दिया था। उच्च न्यायालय ने कहा था कि लोकपाल को महुआ मोइत्रा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने का आदेश देने से पहले स्वीकृति के पहलू पर विचार करना चाहिए था।

लोकपाल की फुल बेंच ने 12 नवंबर, 2025 को लोकपाल कानून की धारा 20(7)(ए) और धारा 23(1) के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए महुआ मोइत्रा के खिलाफ चार हफ्ते में चार्जशीट दाखिल करने का आदेश दिया था। महुआ मोइत्रा ने अपनी याचिका में लोकपाल के इसी फैसले को चुनौती दी थी। महुआ मोइत्रा ने कहा था कि लोकपाल का आदेश नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन है। लोकपाल ने अपना फैसला सुनाने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया।

सीबीआई ने जुलाई में लोकपाल को इस संबंध में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इस मामले में सीबीआई ने 21 मार्च, 2024 को महुआ मोइत्रा और कारोबारी हीरानंदानी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत एफआईआर दर्ज किया था। महुआ मोइत्रा पर आरोप है उन्होंने हीरानंदानी से रिश्वत लेकर अडानी के बारे में सवाल पूछे थे और अपना लॉग-इन पासवर्ड भी हीरानंदानी से साझा किया था।

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महुआ मोइत्रा पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर लोकसभा सीट से सांसद हैं। उनकी 8 दिसंबर, 2023 लोकसभा की सदस्यता खत्म कर दी गई थी। संसद की एथिक्स कमेटी ने महुआ मोइत्रा को पैसे लेकर सवाल पूछने के आरोप को सही मानते हुए संसद की सदस्यता खत्म करने की अनुशंसा की थी।

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