मऊ में लाशो के गाड़ने का मामला : जांच में जुटी पुलिस. जमीन सार्वजनिक मिली तो कार्यवाही की लटक सकती है तलवार

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मऊ।    आधा दर्जन लोगो के द्वारा चिकत्सको  के भेष में जेसीबी के माध्यम शवों को जमीन में गाड़ने कि वायरल वीडियो को लेकर पुलिस अधीक्षक डॉक्टर इला मारन गंभीर हो गए है । वायरल वीडियो के साथ खरी दुनिया द्वारा प्रकाशित खबर के बाद बापू आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल ने पत्र जारी लाश को खुद के परिसर में डिस्पोज करने में खुलासा किया. लेकिन लाशो के डिस्पोजल का कार्य कॉलेज की बाउंड्री के बाहर सर्वजनिक स्थल किया गया है। पुलिस अनाटॉमी एक्ट 1956 के तहत कॉलेज के द्वारा लाशो के डिस्पोजल स्थल और प्रक्रिया की जाँच कर रही है ।

विभागीय सूत्रों के अनुसार अनाटॉमी एक्ट के तहत कॉलेज में पढ़ने वाले चिकित्सकों के लिए शासन द्वारा उन लाशो को देने का प्रविधान है, जिनकी मृत्यु के 24 घंटे के अंदर चिन्हाँकन नहीं होता । बीते 19 मार्च को बापू आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के छात्रों और प्रोफ़ेसरो के द्वारा खेल कूद के सार्वजनिक मैदान की जमीन में एक्ट के तहत मिली लाश को गाड़ने का काम किया गया था. लाशो से लाल रंग का श्राव हो रहा था । जिसका वीडियो में प्रत्यक्ष दर्शीयो के द्वारा वीडियो में ही जिक्र किया जा रहा है।

वायरल वीडियो को खरी दुनिया ने प्रमुखता से प्रकाशित करते हुए सवाल किया था. खबर के प्रकाशन उपरांत हरकत में आयी पुलिस जाँच में जुट गई, तो कॉलेज ने लाशो को खुद के द्वारा जमीन में गाड़ने का खुलासा कर दिया, लेकिन जमीन कौन सी? पर आकर मामला आपराधिक कृत्यो में शामिल होने लगा क्योंकि ऐसी लाशो की कॉलेज द्वारा प्राप्ति और उसके डिस्पोजल तक के प्रविधान है ।

पुलिस जाँच में जुटी 

एसपी इला मारन ने मीडिया से बातचीत में मामले को सोशल मीडिया से जानकारी होने के साथ लाशो को एक मैदान में गाड़ने का जिक्र करते हुए मामले की जाँच की जानकारी दी है।  समाचार दिए जाने तक लाशो के गाड़ने की जगह कैसी? यानि वह जगह कॉलेज की या फिर सार्वजनिक उपयोग की . के तथ्य अभी हाथ नहीं लगे है । बहरहाल मामले में पुलिस जाँच कर रही है ।

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क्या कहता है अनाटॉमी एक्ट ? 

कॉलेज के प्रिंसिपल ने लाशो को अनाटॉमी एक्ट के तहत मिलने बात तो स्वीकार करते हुए लाशो को कॉलेज परिसर में ही गाड़ने कि बात कही है, जबकि वायरल वीडियो में जमीन सार्वजनिक उपयोग की बताई जा रही है और इलाकई लोगो में कॉलेज प्रबंधन के पूर्व के आपराधिक कृत्यो को देखते हुए मुखर होने में डर भी रहे है ।

लाशो के गाड़ने की जमीन यदि सार्वजनिक हुई तो अपराध माना जायेगा 

अनाटॉमी एक्ट में मेडिकल कॉलेज को लाश प्राप्त करने के अधिकारों का वर्णन है तो अनुसंधान (पढ़ाई उपरांत ) लाशो के डिस्पोजल का स्थान और तरीके का भी हवाला है। कॉलेज ऐसी लाशो को कॉलेज के बुरियल ग्राउंड में ही गाड़ने के लिए वह भी ससम्मान बाध्य है ।  इसके बिपरीत जाने पर अनाटॉमी एक्ट में सजा का भी प्रविधान है ।

क्या कहती है अनाटॉमी एक्ट की जानकार मनीषा उपाध्याय 

जनपद आजमगढ़ के चक्रपन पुर में स्थित पीजिआई के अनाटॉमी बिभाग की मनीषा उपाध्यक्ष ने खरी दुनिया से मोबाइल बातचीत में बताया की शवों को ससम्मान कॉलेज के बरियल ग्राऊंड में ही दफानाने / गाड़ने का प्रविधान है। लाश को सार्वजनिक स्थल पर एक्ट के अनुसार अपराध है।

शवो का संबंधित धर्म के अनुसार निस्तारण 

कॉलेज के द्वारा शवो के इस्तेमाल के बाद उसका निस्तारण मृत व्यक्ति के धर्म के अनुसार किया जाना चाहिए, अन्यथा की स्थिति में धार्मिक भावनाए भी आहत करने का अपराध बनता है। शव का अंतिम संस्कार भी केवल अधिकृत स्थान पर ही करने का प्रविधान है , अन्यथा की स्थिति में आपराधिक कृत्य माना जा सकता है।

प्रिंसिपल के पत्र से झूठी जानकारी देने का भी अपराध 

अनाटॉमी एक्ट के अनुसार लाशो को कॉलेज परिसर में गाड़ने की बात के बिपरीत लाशो के गाड़ने वाली जमीन को सार्वजनिक उपयोग की मिलने पर और लोक सेवक के समक्ष झूठी जानकारी देने का भी अपराध बन सकता है. ज़ब लाशो को गाड़ने की जगह कॉलेज का बरियल ग्राउंड नां होने और सार्वजनिक उपयोग की निकलने पर कॉलेज पर कार्यवाही की तलवार के भी लटकने के आसार है ।

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