नेपाल सरकार ने क्रिकेट एसोसिएशन को दी निलंबित करने की चेतावनी

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काठमांडू। नेपाल क्रिकेट संघ (केएएन) के भीतर बढ़ती आर्थिक अपारदर्शिता, गंभीर भ्रष्टाचार और कानून उल्लंघन के आरोप लगाते हुए युवा तथा खेलकूद मंत्रालय ने संघ को निलंबन की ‘अंतिम चेतावनी’ दी है।

मंत्रालय ने राष्ट्रीय खेलकूद परिषद् को पत्र भेजकर केएएन को अंतिम बार स्पष्टीकरण मांगने और कार्रवाई प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। पत्र में कहा गया है कि संघ ने कानून की निर्धारित शर्तों का गंभीर उल्लंघन किया है। एक्ट की धारा 28 (च) के अनुसार मंत्रालय या परिषद द्वारा लेखा और वित्तीय अभिलेख मांगने पर संबंधित संस्था को सभी दस्तावेज उपलब्ध कराना अनिवार्य है, लेकिन कैन ने बार-बार चेतावनी के बावजूद अपने वित्तीय लेनदेन का विवरण देने से इनकार किया है।

विशेष रूप से नेपाल प्रीमियर लीग (एनपीएल) से हुई आय और खर्च का विवरण संघ ने गोपनीय रखा है। धारा 28 (ङ) के अनुसार संघ को हर वर्ष कम से कम एक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता आयोजित करनी होती है, लेकिन उसकी आर्थिक पारदर्शिता दिखाने की जिम्मेदारी से केएएन पीछे हटता दिखाई दिया है।

क्रिकेट एसोसिएशन नेतृत्व पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई गई थी। उसी शिकायत के आधार पर मंत्रालय ने एक जांच समिति बनाई। परिषद की सदस्य रंजना प्रधान के नेतृत्व में गठित कार्यदल की जांच में केएएन के कई कानूनी उल्लंघन और आर्थिक अनियमितताओं का खुलासा हुआ। रिपोर्ट के अनुसार एनपीएल आयोजन के दौरान कई गंभीर गड़बड़ियां पाई गईं।

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जांच में सामने आया कि एनपीएल गवर्निंग काउंसिल ने मैदान में ऑनलाइन जुआ चलाने वाली कंपनियों के “सरोगेट” विज्ञापन लगाकर प्रचार किया। इसके अलावा भारतीय कंपनी टीसीएम के साथ अनधिकृत समझौता किया गया तथा नेपाली कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार कर विदेशी मुद्रा में भुगतान किया गया। एनपीएल के दोनों सीजन की गवर्निंग काउंसिल का नेतृत्व केएएन के सचिव और नेपाली क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान पारस खड्का कर रहे हैं। काउंसिल में कोषाध्यक्ष पदम बहादुर खड्का और सदस्य सुदीप अर्याल भी शामिल हैं।

इसके अलावा क्रिकेट एसोसिएशन पर सार्वजनिक खरीद ऐन के विपरीत बिना किसी प्रतिस्पर्धा के स्टार स्पोर्ट्स को टेंडर देने का आरोप भी है। साथ ही कुछ निश्चित कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए कानून उल्लंघन करने तथा विज्ञापन नियमन कानून की अनदेखी कर नेपाली मीडिया और विज्ञापन उद्योग की क्षमता को दरकिनार कर विदेशी कंपनियों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।

मंत्रालय के अधिकारी प्रदीप कुमार खड्का ने पत्र में कहा है कि यदि आयोग की ओर से मांगे गए जवाब और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए, तो कानून की धारा 29 के अनुसार कैन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए निलंबन तक की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

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