ईरान ने कहा- आत्मसमर्पण नहीं करेगा, अमेरिका बोला- अभूतपूर्व सैन्य कार्रवाई होगी

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तेहरान/वाशिंगटन। जलडमरूमध्य और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने कहा है कि वह अमेरिका के सामने आत्मसमर्पण नहीं करेगा। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ ने बुधवार कहा कि हर ईरानी की युद्ध के लिए इच्छाशक्ति मजबूत है। ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा है कि अगर अमेरिकी शर्तें ईरान नहीं मानता तो उसे अभूतपूर्व सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

अल जजीरा, सीबीएस न्यूज और फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, स्पीकर गालिबफ ने ईरान की अर्ध सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के एक रिकॉर्डेड संबोधन में कहा, “हम पूरी इच्छाशक्ति के युद्ध के लिए तैयार हैं।” उन्होंने कहा कि अमेरिका की खुली और छुपी हुई गतिविधियों से साफ है कि उसने आर्थिक और राजनीतिक दबाव के साथ-साथ अपने सैन्य लक्ष्यों को नहीं छोड़ा है। वह कभी भी हमला करने का दुस्साहस कर सकता है। गालिबफ ने देशवासियों से कहा कि जवाब देने के लिए तैयार रहें। ईरानी सशस्त्र बलों ने संघर्ष विराम की अवधि का सर्वोत्तम उपयोग अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने में किया है।

गालिबफ ने संबोधन में बढ़ते आर्थिक दबावों और जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों को स्वीकार किया। उन्होंने आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए नई संसदीय निगरानी व्यवस्था बनाने की घोषणा की। गालिबफ ने आखिर में मौजूदा दौर को राष्ट्रीय सहनशक्ति की व्यापक परीक्षा के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, “हम इच्छाशक्ति के युद्ध में हैं। जो कोई भी यह युद्ध जीतेगा, वही ईरान का इतिहास लिखेगा और उसका भविष्य तय करेगा।”

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इस पर व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ईरान के नेतृत्व को गतिरोध के संबंध में कड़ी चेतावनी जारी की। मिलर ने कहा कि ईरान के पास अभी भी संतोषजनक समझौता करने का विकल्प है। अगर ईरान ऐसा नहीं करता तो उसे अमेरिका सेना की ऐसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, जो आधुनिक इतिहास में पहले कभी नहीं हुई।

ईरान में हालिया गठित फारसी खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण ने बुधवार को होर्मुज जलडमरूमध्य का नक्शा एक्स पर जारी किया है। इसमें दावा किया गया है कि एक रेखा जलडमरूमध्य के पूर्व में ईरान के कुह मुबारक और संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा के दक्षिण को जोड़ती है, वह ईरान नियंत्रित जल क्षेत्र है। साथ ही दूसरी रेखा पश्चिम में ईरान के केश्म द्वीप के छोर और उम अल-क़ैवेन को जोड़ती है। यह क्षेत्र भी ईरान का है। पोस्ट में कहा गया है कि यहां से गुजरने वाले जहाजों को प्राधिकरण से समन्वय करने के साथ अनुमति भी लेनी होगी। ईरानी शासन ने प्राधिकरण को शिपिंग कंपनियों से शुल्क इकट्ठा करने के लिए अधिकृत किया है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही बातचीत में ईरान के जवाब का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसमें देरी ईरान के लिए घात होगी। ट्रंप ने बुधवार दोपहर जॉइंट बेस एंड्रूज में पत्रकारों से कहा, ” इसलिए इंतजार कर रहा हूं कि लोगों की जान बच सके। अगर सही जवाब नहीं मिलता तो स्थितियां तेजी से बदलेंगी।”

अमेरिका सेंट्रल कमांड ने बुधवार को कहा कि ईरानी बंदरगाहों की सैन्य निगरानी जारी है। यूएस मरीन ने ईरानी झंडे वाले टैंकर पर चढ़कर तलाशी ली। इस टैंकर पर नाकेबंदी का उल्लंघन करने की कोशिश करने का शक था। यह टैंकर एक ईरानी बंदरगाह की ओर जा रहा था। बाद में चालक दल को रास्ता बदलने का निर्देश देते हुए टैंकर को छोड़ दिया गया। कमांड ने कहा कि नाकाबंदी का पालन सुनिश्चित करने के लिए 91 कमर्शियल जहाजों को मार्ग बदलना पड़ा है।

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