ईरान युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज से गुजरा जापान का पहला तेल टैंकर, आइची प्रांत पहुंचा

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टोक्यो (जापान)। जापान का एक तेल टैंकर (जहाज) सोमवार को सुरक्षित आइची प्रांत पहुंच गया। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला जापान का यह पहला टैंकर है। इस युद्ध के कारण ऊर्जा के इस अहम रास्ते से होने वाला आवागमन काफी हद तक बाधित है। यह टैंकर प्रमुख रिफाइनर कंपनी ‘इडेमित्सु कोसान कंपनी’ की एक इकाई का है। इस टैंकर में 20 लाख बैरल कच्चा तेल है। यह टैंकर देश के मध्य क्षेत्र में स्थित आइची प्रांत पहुंचा है। यह मात्रा जापान की दैनिक घरेलू मांग का लगभग 80 प्रतिशत है।

जापान टुडे और सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार टैंकर का चालक दल पूरी तरह स्वस्थ हैं। इस दल में तीन जापानी नागरिक भी शामिल हैं। मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस जहाज का जापान पहुंचना ऊर्जा की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिहाज से एक सुखद समाचार है। उन्होंने कहा कि जापान ने ईरान से आग्रह किया था कि वह सभी देशों के जहाजों के लिए इस जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध मार्ग सुनिश्चित करे।

सरकार के शीर्ष प्रवक्ता किहारा ने कहा कि फारस की खाड़ी में अभी भी जापान के 39 जहाज फंसे हुए हैं। इनमें से एक जहाज पर जापान का चालक दल भी मौजूद है। उन्होंने कहा, “हम लगातार सभी कूटनीतिक प्रयास करते रहेंगे और आपसी तालमेल सुनिश्चित करेंगे ताकि सभी जहाज जल्द से जल्द इस जलडमरूमध्य से गुजर सकें।”

जहाजों के ‘ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम’ के अनुसार पनामा का झंडा लगा 300 मीटर से भी अधिक लंबा यह जहाज (इडेमित्सु मारू) फरवरी के अंत में फारस की खाड़ी में प्रवेश कर चुका था। तब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू नहीं किए थे। इस जहाज ने सऊदी अरब से कच्चा तेल भरा और मार्च की शुरुआत में वहां से रवाना हुआ। तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध किया जा चुका था। इसलिए अबू धाबी के तट के पास इस जहाज को रोक दिया गया था। 28 अप्रैल को यह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरा।

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इस जहाज ने ईरान को किसी भी प्रकार का ‘पारगमन शुल्क’ नहीं दिया। फारस की खाड़ी से निकलने के बाद यह जहाज भारत के समुद्री क्षेत्र और फिर मलक्का जलडमरूमध्य से होते हुए जापान पहुंचा। बताया गया है कि जापान की एक अन्य प्रमुख तेल कंपनी एनिओस होल्डिंग्स इंक का एक तेल टैंकर भी मई के मध्य में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर चुका है। उम्मीद है कि यह टैंकर मई के अंत और जून की शुरुआत के बीच किसी समय जापान पहुंच सकता है।

सनद रहे, जापान फारस की खाड़ी से मिलने वाले तेल पर बहुत अधिक निर्भर है। हाल के महीनों में तेल की बढ़ती कीमतों के असर को कम करने के लिए उसने अपने विशाल रणनीतिक आपातकालीन पेट्रोलियम भंडार से ऐतिहासिक मात्रा में तेल जारी किया है।

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