मऊ मे फायर सेफ्टी आदि के मानक को ताक पर रखकर सीएफओ ने जारी क़ी हैँ निजी अधिकांश अस्पतालो को एनओसी

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ब्रह्मा नन्द पाण्डेय अधिवक्ता उच्च न्यायालय इलाहाबाद 

मऊ। जिले में संचालित निजी हॉस्पिटलो, स्कूलों, कोचिंग सेंटरो और होटलो के नाम अग्नि समन विभाग से जारी एनओसी को कानून कायदो को ताक पर रख कर जारी किये जाने की खबर हैं। एनओसी को जारी करते समय अग्नि समन विभाग ने संबंधित अधिकांश हॉस्पिटल की बिल्डिंग नेशनल बिल्डिंग कोड 2005 के अनुसार हैं कि नहीँ? उसमे अग्नि सुरक्षा, पार्किंग, सेटबैक, स्वच्छता तथा मरीजों की सुरक्षा से संबंधित मानको kii ब्यवस्थाओ को बिना जांचे परखे जारी किया हैँ। नेशनल बिल्डिंग कोड 2005 के अनुसार किसी भी बिल्डिंग में फायर सेफ्टी की ब्यवस्थाओ के आभाव मे हॉस्पिटल को विभाग से एनओसी नहीं जारी क़ी जा सकती हैं।

 

उपरोक्त हॉस्पिटल के भवन के चारो तरफ कोई सेट बैक नहीं नोच जारी हैँ 

विभागीय सूत्रों के अनुसार वर्ष 2005 में माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ खंडपीठ से याचिका संख्या 5696(एमबी )/2005 में जारी आदेश के बाद बने शासनादेश का पालन अधिकांश भवनों में नहीँ किया गया हैं, लेकिन सीएफओ ने एनओसी जारी की हैं। जन कल्याण सेवा समिति आलमबाग लखनऊ के द्वारा माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ खंडपीठ में जनहित याचिका दाखिल कर अस्पतालो आदि में उस समय के मौजूदा “फायर सेफ्टी” आदि की ब्यवस्था पर सवाल उठाया गया था। अदालत के आदेश के अनुसार जिले अधिकांश अस्पतालो के मानचित्रो में फायर सेफ्टी के इंतज़ाम का आभाव हैं फिर भी अग्नि सामन विभाग से उन्हें अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी हैँ।

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हॉस्पिटल, स्कूल, होटल, कोचिंग सेंटर आदि को अग्नि समन विभाग के मुख्य अग्नि समन अधिकारी के द्वारा संबंधित भवन के “स्वीकृत नक्शे” में अग्नि समन और सुरक्षा उपायो के अनुसार फायर सेफ्टी के मापदंडो को सही पाए जाने पर ही एन ओ सी को जारी किये जाने का प्रविधान हैं । इस आदेश को नेशनल बिल्डिंग कोड 2005 में भी लिया गया हैं। मुख्य अग्नि समन अधिकारी के द्वारा हॉस्पिटलो को तभी अनापट्टी प्रमाण पत्र जारी किया जायेगा ज़ब नर्सिंग होम एवं अस्पतालों का संचालन निर्धारित भवन मानकों के अनुरूप हो। स्थानीय निकायों एवं विकास प्राधिकरणों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि अस्पतालों एवं नर्सिंग होमों का निर्माण स्वीकृत मानचित्र एवं लागू भवन उपविधियों के अनुसार हो। अग्नि सुरक्षा, पार्किंग, सेटबैक, स्वच्छता तथा मरीजों की सुरक्षा से संबंधित मानकों के पालन पर बल दिया गया। अदालत द्वारा राज्य सरकार तथा फायर सेफ्टी से लेकर संबंधित प्राधिकरणों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने एवं अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया।
इनके आभाव मे नहीं जारी होंगी एनओसी 
उत्तर प्रदेश में अस्पताल (Hospital) या नर्सिंग होम के लिए सामान्यतः निम्न मानक अपनाए जाते हैं:
1. न्यूनतम भूमि (Plot Area)
छोटे नर्सिंग होम (10–20 बेड): लगभग 500–1000 वर्गमीटर भूमि।
30–50 बेड अस्पताल: प्रायः 1500–3000 वर्गमीटर या अधिक।
बड़े अस्पतालों के लिए आवश्यकता और बढ़ जाती है।
2. सड़क (Approach Road)
एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड एवं अन्य आपात वाहनों की आवाजाही के लिए पर्याप्त चौड़ाई आवश्यक होती है।
सामान्यतः 9 मीटर (लगभग 30 फुट) या उससे अधिक चौड़ी सड़क को उपयुक्त माना जाता है।
बड़े अस्पतालों के लिए इससे अधिक चौड़ी सड़क की आवश्यकता हो सकती है।
3. भवन के चारों ओर खुली जगह (Setback)
सामान्यतः:
सामने (Front setback): लगभग 6–9 मीटर
साइड setback: 3–6 मीटर
पीछे (Rear setback): 3–6 मीटर
इन खुली जगहों का उद्देश्य:
अग्निशमन वाहनों की पहुंच,
वेंटिलेशन और प्रकाश,
आपात निकासी,
तथा सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
4. फायर सेफ्टी की दृष्टि से
अस्पताल भवन के चारों ओर पर्याप्त खुला मार्ग होना चाहिए ताकि फायर ब्रिगेड वाहन भवन के पास तक पहुँच सकें। बहुमंजिला या बड़े अस्पतालों में यह विशेष रूप से आवश्यक है

Nbc के अनुसार अस्पताल भवनो का आभाव, फिर भी जारी हैँ NOC

नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार जिले मे कोई भी हॉस्पिटल भवन नहीं हैँ। रहाल हॉस्पिटल कि जमीन भी नान जेड ए और संक्रमनीय भूमी के रूप मे दर्ज हैँ। जमीन नान जेड ए मे श्रेणी 6(1) क़ी हैँ. यह भूमी संक्रमनीय भूमि के रूप मे हॉस्पिटल के मालिक के नाम दर्ज हों गई, सवाल हैँ

सीएफओ ने कहा जारी समस्त अनापट्टी प्रमाण पत्र नियमानुसार जारी किया गया हैँ।

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