मऊ में ऊर्जा मंत्री पर तथ्यहींन टिप्पणी पर मुकदमा, हिरासत में टिप्पणी कर्ता

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     ब्रह्मा नन्द पाण्डेय  (विधि संवाददाता)

मऊ । साजिस के तहत तथ्य हींन टिप्पणी का वीडियो बनाकर ऊर्जा मंत्री आदि को बदनाम करने के मामले में घोसी पुलिस द्वारा शनिवार को घोसी के वार्ड नम्बर 12 के सभासद को हिरासत में लिए जाने की खबर हैँ। वीडियो को बनाने वाले और वायरल करने वाले को भी पीड़ित ने अपनी तहरीर में आरोपी बनाया हैँ। फिलहाल पुलिस जाँच में जुटी हैँ।

प्रभारी निरीक्षक घोसी ने मामले में प्रथमिकी दर्ज कर घोसी के वार्ड नम्बर 12 के सभासद को हिरासत में लिए जाने की बात कही हैँ। वायरल वीडियो में सभासद द्वारा यह कहा जा रहा हैँ कि घोसी के अध्यक्ष द्वारा मीटिंग दौरान ऊर्जा मंत्री को उपहार दिया गया हैँ।

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वायरल वीडियो का खरी दुनिया समर्थन नहीं करता हैँ,। पुलिस ने मामले में 67 आईटी एक्ट की धारा को भी एफ आई आर में मेंशन किया हैँ। वीडियो बनाने वाले और उसको वायरल करने वाले के खिलाफ भी आरोप हैँ। वीडियो बनाने वाले पर और उसको वायरल करने वाले को लेकर पुलिस फिलहाल मौन साधना में हैँ। प्रभारी निरीक्षक थाना घोसी जनपद मऊ ने खरी दुनिया से बातचीत में मामले की जांच की बात कही हैँ।

बीते जनवरी माह में बनी वीडियो 

खरी दुनिया ने इस घटना की सच्चाई को समाज के सामने लाने के लिए वीडियो बनाने वाले विमल राय से उनके मोबाइल नम्बर पर रिंग कर सच्चाई जानी । श्री राय ने इस वीडियो को जनवरी माह में बनाने की बात स्वीकार करते हुए अपने एक साथी के द्वारा वायरल किया जाना बताया।

आरोपियो की गिरफ्तारी पर ? उठ रहे सवाल 

(सतेंदर कुमार एंटील v. सीबीआई ) पुलिस द्वारा मामले में टिप्पणी करने वाले आफताब की गई गिरफ्तारी को लेकर पुलिसिया जाँच पर भी सवालो में आ गई हैँ।दर्ज आरोपों के मुताविक किसी भी सेक्शन की सजा सात साल से अधिक की नहीं हैँ।  सत साल तक या फिर इससे कम की सजा वाले आरोपों में पुलिस को तुरंत गिरफ्तारी का पावर नहीं हैँ। जाँच में सहयोग नहीं करने पर ही पुलिस गिरफ्तार कर सकती हैँ। इसके पहले आरोपियों को बीं एन एस एस की धारा 35 ए की नोटिस देना जरुरी हैँ। कानूनी प्रक्रियओ के पालन किये वगैर की गई गिरफ्तारी कानून की अवमानना की श्रेणी में आती हैँ।

67 आईटी एक्ट पर सवाल 

पीड़ित द्वारा डी गई तहरीर के मुटाविक दर्ज मुकदमे की अन्य धाराओं में आईटी एक्ट की धारा 67 नहीं बनती हैँ लेकिन चुकी यह धारा गैर जमानती अपराध में आती हैँ इस लिए पुलिस द्वारा गिरफ्तारी को लक्ष्य बनाकर लगाई गई प्रतीत होती हैँ ।

पत्रकारों के उत्पीड़न को लेकर खरी दुनिया जल्द अदालत में हो सकती  हैँ 

पत्रकारों को लेकर राजनितिक दबाव में पुलिस द्वारा की जा रही कार्यवाही को लेकर  खरी दुनिया ने माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की योजना में हैँ।  बिना आरोप, धाराएं जोड़ने और बिना विधिक प्रक्रियाओ का पालन किये, पत्रकारों की, की गई गिरफ्तारी को लेकर साक्ष्यो के संकलन की जरूरत पूरी करने को कोई भी खरी दुनिया के मेल आईडी पर सम्पर्क कर सकता हैँ।

 

 

 

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