हाईकोर्ट ने बरेली में घर के भीतर नमाज़ अदा करने के मामले में निस्तारित की याचिका

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–याची ने हाईकोर्ट में वादा किया कि वह विवादित स्थल पर बड़ी संख्या में लोगाें को नमाज़ के लिए इकट्ठा नहीं करेगा

–हाईकोर्ट ने याचिका निस्तारित कर डीएम एवं एसएसपी को जारी अवमानना नोटिस निरस्त की

प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बरेली में घर के भीतर नमाज अदा करने से रोकने को लेकर दाखिल याचिका निस्तारित कर दी है। कोर्ट ने नमाज के नाम पर घर में भीड़ जुटाने पर आपत्ति जताते हुए याची से ऐसा नहीं करने की अंडरटेकिंग ली। साथ ही कहा कि याची अंडरटेकिंग का उल्लंघन करता है और दोबारा भीड़ जुटाता है, जिससे इलाके की शांति व कानून-व्यवस्था को खतरा पैदा होता है तो बरेली प्रशासन व पुलिस कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।

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कोर्ट ने बरेली के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को जारी अवमानना नोटिस भी निरस्त कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव एवं न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने बरेली के तारिक खान की याचिका पर उसके अधिवक्ता राजेश कुमार गौतम, राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी, एजीए समीर शंकर और स्थायी अधिवक्ता अनुभव चंद्रा को सुनकर अंतिम रूप से निस्तारित करते हुए दिया है।

इससे पूर्व कोर्ट ने डीएम व एसएसपी की ओर से दाखिल हलफनामे पर संतोष जताया। प्रशासन की ओर से अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट को तस्वीरों के साथ बताया कि याची सुरक्षा का फायदा उठाकर रोजाना 50 से 60 लोगों को नमाज़ के लिए बुला रहा है, जिससे इलाके की शांति व्यवस्था को खतरा हो सकता है। एडिशनल एडवोकेट जनरल ने हलफनामों के साथ संलग्न याची की सम्पत्ति की तस्वीरें प्रस्तुत करते हुए कहा कि यदि इसे जारी रखने की अनुमति दी जाती है तो यह क्षेत्र की शांति और सौहार्द के लिए हानिकारक होगा। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत सुरक्षा के बहाने इसे अनुमति नहीं दी जा सकती है और जिला व पुलिस प्रशासन कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है। इसलिए यदि कानून व व्यवस्था की स्थिति में कोई खतरा है तो प्रशासन व पुलिस को कार्रवाई करने का अधिकार है।

प्रशासन के इस आरोप पर याची के वकील ने कोर्ट को भरोसा दिलाया और अंडरटेकिंग दी कि भविष्य में याची विवादित जगह पर बड़ी संख्या में लोगों को नमाज़ के लिए इकट्ठा नहीं करेगा। इस पर कोर्ट ने याची व अन्य लोगों के खिलाफ जारी चालान तत्काल वापस लेने का निर्देश दिया।

याची की ओर से बताया गया कि हसीन खान को कोर्ट के आदेश से जो सुरक्षा मिली थी, उसकी अब जरूरत नहीं है। इस पर कोर्ट ने पुलिस को वह सुरक्षा वापस लेने के आदेश दिए। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी भी की कि याची अपनी अंडरटेकिंग का उल्लंघन करता है और इस याचिका में उल्लिखित सम्पत्ति पर नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा करता है एवं उससे क्षेत्र की शांति व सौहार्द के लिए कोई खतरा है तो जिला प्रशासन व पुलिस को कानून के अनुसार कार्रवाई करने का अधिकार है।

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