कैट ने व्यापार एवं एमएसएमई के लिए वित्त मंत्री से राहत उपायों की घोषणा का किया आग्रह

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नई दिल्ली। कारोबारियों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने पश्चिम एशिया संकट के कारण व्यापार और एमएसएमई पर संभावित प्रतिकूल असर को देखते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से राहत उपायों की घोषणा करने का आग्रह किया है।

सांसद एवं कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने सोमवार को एक बयान में पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण भारत के व्यापार और उद्योग, विशेषकर छोटे व्यापारियों एवं एमएसएमई क्षेत्र पर संभावित असर को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने वित्त मंत्री से छोटे व्यापारियों के लिए ऋण, लॉजिस्टिक्स और कच्चे माल की आपूर्ति में बाधाओं के मद्देनजर एक समर्पित टास्क फोर्स के गठन और समय पर राहत उपायों की मांग की गई है, ताकि स्थिरता बनी रहे।

खंडेलवाल ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन को आज भेजे एक पत्र में कहा कि स्रोतों के विविधीकरण, लॉजिस्टिक्स ढांचे के सुदृढ़ीकरण, संतुलित वित्तीय प्रबंधन तथा आवश्यक वस्तुओं की निरंतर निगरानी जैसे कदमों ने देश में उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित रखा है, जिससे व्यापार जगत में विश्वास बना है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, आपूर्ति बाधाएं और लागत में बढ़ोतरी से कई क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इनमें प्रमुख रूप से पेट्रोकेमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, प्लास्टिक, टेक्सटाइल, उर्वरक, केमिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, लॉजिस्टिक्स और अन्य ऊर्जा-आधारित उद्योग शामिल हैं।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने कहा कि निर्यातकों को फ्रेट और बीमा लागत में वृद्धि, शिपमेंट में देरी, रूट परिवर्तन तथा भुगतान संबंधी अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होगी। भरतिया ने कहा कि व्यापार और उद्योग जगत में बढ़ती लागत, कार्यशील पूंजी पर दबाव, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, मुनाफे में कमी और ऋण भार में वृद्धि को लेकर गंभीर चिंता है, विशेषकर एमएसएमई क्षेत्र में।

इन परिस्थितियों को देखते हुए दोनों व्यापारी नेताओं ने सरकार से आग्रह किया है कि एमएसएमई एवं छोटे व्यापारियों को ऋण चुकौती में अतिरिक्त समय एवं राहत, प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष क्रेडिट गारंटी योजना, गंभीर रूप से प्रभावित उद्योगों के लिए ब्याज सब्सिडी, ईंधन एवं कच्चे माल की कीमतों की निरंतर निगरानी और स्थिरीकरण उपाय तथा निर्यातकों के लिए फ्रेट, बीमा सहायता एवं शीघ्र रिफंड सुनिश्चित हो, जिससे उनको व्यापार में असुविधा न हो।

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