केंद्र ने 24,815 करोड़ की दो मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को दी मंजूरी, उप्र, आंध्र प्रदेश में बढ़ेगी कनेक्टिविटी

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नई दिल्ली। केंद्रीय कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश के 15 जिलों को कवर करने वाली दो मल्टी-ट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिससे भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 601 किलोमीटर की वृद्धि होगी। इनकी कुल अनुमानित लागत लगभग 24,815 करोड़ रुपये है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में कैबिनेट के फैसलों को जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) की बैठक में रेल मंत्रालय की दो महत्वपूर्ण मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 24,815 करोड़ रुपये है और इनके जरिए उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश के 15 जिलों में रेल नेटवर्क का बड़ा विस्तार किया जाएगा। इस पहल से करीब 601 किलोमीटर रूट और 1,317 किलोमीटर ट्रैक लंबाई में वृद्धि होगी, जिससे रेल संचालन अधिक तेज, सुरक्षित और विश्वसनीय बन सकेगा।

वैष्णव ने बताया कि उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद से सीतापुर तक तीसरी और चौथी लाइन (403 किमी) बिछाई जाएगी, जिसकी अनुमानित लागत 14,926 करोड़ रुपये है। यह परियोजना दिल्ली–गुवाहाटी हाई डेंसिटी नेटवर्क का अहम हिस्सा है और इसके तहत नए स्टेशनों का निर्माण भी किया जाएगा। यह लाइन उन इलाकों से होकर गुजरेगी जहां मौजूदा रेल नेटवर्क पर दबाव 168 प्रतिशत तक पहुंच चुका है और भविष्य में इसके 200 प्रतिशत से अधिक होने की संभावना है। इस परियोजना से माल ढुलाई क्षमता में भारी वृद्धि होगी, जिससे कोयला, खाद्यान्न और स्टील जैसे प्रमुख सामानों का परिवहन आसान होगा। इससे हर साल हजारों करोड़ रुपये की लॉजिस्टिक लागत में बचत होगी और लाखों मानव-दिवस रोजगार सृजित होंगे।

आंध्र प्रदेश में राजमुंदरी (निदादवोलु) से विशाखापत्तनम (दुव्वाडा) के बीच 198 किमी लंबी तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने को मंजूरी दी गई है, जिसकी लागत 9,889 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह मार्ग देश के सबसे व्यस्त रेल कॉरिडोर में शामिल है और यहां पहले से ही क्षमता का उपयोग 130 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इस परियोजना के तहत गोदावरी नदी पर 4.3 किलोमीटर लंबा विशाल रेल पुल, कई बड़े और छोटे पुल, अंडरपास और एलिवेटेड ट्रैक बनाए जाएंगे। इससे पूर्वी तट के प्रमुख बंदरगाहों से कनेक्टिविटी बेहतर होगी और औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलेगी। यह परियोजना हावड़ा–चेन्नई हाई डेंसिटी कॉरिडोर का प्रमुख हिस्सा है और पूर्वी तट के प्रमुख बंदरगाहों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।

सरकार के अनुसार इन दोनों परियोजनाओं से मिलकर हर साल करोड़ों किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। सड़क से रेल की ओर माल ढुलाई शिफ्ट होने से लॉजिस्टिक लागत घटेगी और देश की ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी। इसके अलावा, इन परियोजनाओं से धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी आसान होगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

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सरकार ने स्पष्ट किया कि ये परियोजनाएं पीएम-गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत विकसित की जाएंगी, जिसका उद्देश्य मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। केंद्र सरकार का मानना है कि इस तरह के बड़े बुनियादी ढांचा निवेश से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।

सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही तेज होगी, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी और औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा। साथ ही इनसे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।

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