छग विधानसभा :आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन को लेकर स्वास्थ्य मंत्री सदन में घिरे ,नया कानून लाने का आश्वासन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को आज (बुधवार )विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के विधायकों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। इस मुद्दे मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल सदन में घिर गए।आसंदी ने भी निर्देशित करते हुए कहा कि इस पर मंत्री को जल्द से जल्द निर्णय लेना चाहिए।

ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से कांग्रेस विधायक, बिलाईगढ़ कविता प्राण लहरे ने मुद्दा उठाया, जिसमें सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी स्वर मिलाया। विधायकों ने शिकायत की कि कई पात्र हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड नहीं मिल पा रहे हैं और बड़े निजी अस्पताल मरीजों का इलाज करने से बच रहे हैं। भाजपा विधायक, बेलतरा सुशांत शुक्ला ने बिलासपुर के अपोलो अस्पताल का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने सात बार पत्र लिखा लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विधायकों का आरोप था कि निजी अस्पताल योजना के तहत इलाज देने में आनाकानी कर रहे हैं।आशाराम नेताम ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग गम्भीर ही नहीं है।

स्वास्थ्य मंत्री ने घोषणा की कि विभाग एक सप्ताह के भीतर समीक्षा करेगा और बड़े अस्पतालों को योजना में शामिल करने के लिए आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इसके लिए सरकार नया कानून भी लाएगी।उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में आयुष्मान योजना के लिए ₹1,500 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

वरिष्ठ भाजपा विधायक, कुरुद अजय चंद्राकर, धर्मजीत सिंह और अमर अग्रवाल,बिलासपुर ने कहा कि यह जनहित से जुड़ा हुआ बहुत संवेदनशील मामला है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वपूर्ण योजना है। इस योजना में किसी भी तरह की कोई कोताही नहीं होनी चाहिए।योजना का लाभ पूर्णतया कार्डधारियों को मिलना चाहिए. स्वास्थ्य मंत्री को इस पर घोषणा करनी चाहिए।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस पर घोषणा की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए नियम-निर्देश की आवश्यकता पड़ती है। स्वास्थ्य मंत्री के ऐसा कहते ही सत्ता पक्ष के विधायक अजय चंद्राकर भड़क उठे।उन्होंने मंत्री के जवाब पर असंतोष जताया। उन्होंने मांग की कि बड़े निजी अस्पतालों को योजना में शामिल करने के लिए सरकार को स्पष्ट घोषणा करनी चाहिए और इसके नियमों को सदन के पटल पर रखना चाहिए।

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धर्मजीत सिंह और अमर अग्रवाल ने भी कहा कि घोषणा क्यों नहीं करते सकते मंत्री? उन्हें किस नियम-निर्देश की आवश्यकता बताना चाहिए।

आसंदी ने फिर कहा कि पक्ष और विपक्षी के सभी विधायक, जिन्होंने भाग लिया हो या नहीं, सभी इसके बेहतर क्रियान्वयन को लेकर चिंतित हैं।आसंदी ने स्वास्थ्य मंत्री को आदेश दिया कि वे एक सप्ताह के भीतर विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक बुलाएं। आसंदी ने विशेष रूप से बिलासपुर के अपोलो जैसे बड़े निजी अस्पतालों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि ये अस्पताल योजना के तहत गरीबों का इलाज नहीं कर रहे हैं, तो उन पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

अध्यक्ष ने मंत्री से कहा कि अगर वर्तमान नियमों में कोई खामी है जिससे अस्पताल बच रहे हैं, तो उन नियमों में तुरंत सुधार किया जाए।आसंदी ने स्पष्ट किया कि विधायकों की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी सदन को दी जानी चाहिए।

आसंदी के इसी कड़े हस्तक्षेप के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने सदन में नया कानून लाने तक का आश्वासन दिया।स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सभी सदस्यों ने इस महत्वपूर्ण योजना पर ध्यान आकृष्ट कराया है। आगामी एक सप्ताह में विभागीय समीक्षा कराकर अधिक से अधिक अस्पतालों में इसका लाभ मिले यह निर्णय लेंगे।

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