(ब्रह्मा नन्द पाण्डेय )
-83 आपराधिक केस वाले जानलेवा हमले के आरोपित की जमानत मंजूर
प्रयागराज। उच्च न्यायलय इलाहाबाद ने एम मामले की सुनवाई के दौरान किसी अभियुक्त के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या के आधार पर उसे जमानत से वंचित नहीं किये जाने की बात कही है। जमानत अन्य साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।
कोर्ट ने 83 मुकदमों के आपराधिक इतिहास वाले अभियुक्त दिनेश पाल सिंह उर्फ मुन्ना को बड़ी राहत देते हुए उसकी दस साल की सजा निलम्बित कर दी है और सजा के खिलाफ अपील लम्बित रहने के दौरान सशर्त जमानत मंजूर कर ली है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजवीर सिंह ने दिया है।
शाहजहांपुर जनपद के थाना तिलहर क्षेत्र का मामला है। ट्रायल कोर्ट ने अभियुक्त को धारा 307/34 (हत्या का प्रयास), 323/34 (मारपीट) आईपीसी एवं 3/25 आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। जिसे अपील में चुनौती दी गई है।
अभियोजन के अनुसार होटल में खाने के पैसे मांगने को लेकर विवाद हुआ, आरोपित ने फायरिंग कर दी। हालांकि पीड़ित को कोई गंभीर चोट नहीं लगी और उसे केवल साधारण चोट पाई गई। याची अधिवक्ता ने तर्क दिया कि मामले में साक्ष्य पर्याप्त रूप से अभियोजन के पक्ष में नहीं हैं। गवाह पक्षद्रोही हो चुका है। अधिकांश आपराधिक केसों में याची बरी हो चुका है। याची 66 साल का है, कई बीमारियो से ग्रस्त है। मुकदमों की बड़ी संख्या को देखते हुए अपील शीघ्र सुने जाने की संभावना नहीं है। अभियुक्त एक साल की सजा काट चुका है। इसलिए अपील लम्बित रहने तक जमानत पर रिहा किया जाए।
वहीं, राज्य सरकार ने अभियुक्त के खिलाफ 83 मामलों के आपराधिक इतिहास का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि केवल आपराधिक इतिहास के आधार पर जमानत आवेदन खारिज करना उचित नहीं है, यदि मामले के साक्ष्य राहत देने के पक्ष में हों। कोर्ट ने पाया कि पीड़ित को गंभीर चोट नहीं लगी है और अभियोजन के साक्ष्य अपेक्षाकृत कमजोर हैं। कोर्ट ने 75 फीसदीजमा जुर्माना राशि की वसूली स्थगित कर दी है।










