आईपीएल के पहले क्वालीफ़ायर में टिकटों के दामों में तीन गुणा बढ़ोतरी ने रोके दर्शकों के कदम, कई स्टैंड रहे खाली

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धर्मशाला। धर्मशाला में मंगलवार को आरसीबी व गुजरात जाइंट्स के बीच खेले गए आईपीएल के पहले क्वालीफायर मैच में टिकट के दामों में मात्र 10 दिनों में ही तीन गुणा से भी अधिक बढ़ोतरी का असर साफ दिखा। क्रिकेट प्रेमियों को बड़ा झटका देने के चलते अधिकतर ने मैच को लेकर टिकटें बुक नहीं करवाई। इसके चलते कुछेक स्टैंड खाली दिखे, जबकि इससे पहले सीटों से भी अधिक दर्शक स्टेडियम में पहुंच जाते थे।

धर्मशाला में खेले गए आईपीएल क्वालीफायर-एक में टिकटों के दामों में तीन गुणा से भी अधिक बढ़ौतरी करके क्रिकेट प्रेमियों को बड़ा झटका दिया है। पिछले वर्ष ही मई में हुए आईपीएल मैचों में 1200, 1500, 1800 व दो हज़ार की बजाय इस वर्ष 10 दिन पहले सबसे सस्ती टिकट 2500 रुपए में बेची गई। जबकि आरसीबी व गुजरात टाइटन्स क्वालीफायर-एक के लिए दामों में बढ़ौतरी कर सबसे कम मूल्य की टिकट छह हज़ार में कर दी गई थी। स्टेडियम में ऑनलाईन छह हज़ार से 50 हज़ार रुपए तक की टिकट बेची गई। कॉपरेट बॉक्स में एक टिकट के 50 हज़ार रुपए दाम रखे गए। जबकि क्लब लॉज मैन पेवेलियन जोकि पिछले मैचों में 22 हज़ार 500 में था, उसे 30 हज़ार व पैवेलियन टैरेस 12 हज़ार 500 की बजाय 25 हज़ार में बेचा जा रहा है।

आम लोगों की पहुंच से मैच की टिकट आयोजकों की ओर से पूरी तरह से बाहर कर दी गई। टिकटों के दामों में एकदम से ही तीन से चार हज़ार से 10 हज़ार रुपए तक बढ़ौतरी की गई है। इतना ही नहीं मैच में ऑफलाईन टिकट कांउटर भी एचपीसीए की ओर से नहीं लगाए गए हैं। जबकि हार्ड कापी वाले पास अपने चेहतों को खुलेआम वितरित किए गए। पैसे खर्च करने वाले दर्शकों के लिए ई-टिकट की व्यवस्था की गई है, जबकि चेहतों के प्रवेश के लिए ऑफलाईन जुगाड़ लगाकर पिछले चार मैचों में सैंकड़ों लोगों को प्रवेश करवाए गए हैं। ऐसे में एचपीसीए की मनमानी से क्रिकेट प्रेमी पूरी तरह से मायूस नज़र आ रहे हैं।

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वहीं, फिल्हाल डिस्ट्रिक ऐप्प में मैच के दौरान भी टिकटें पहले ओल्ड करके बेची जाती रही। धर्मशाला स्टेडियम में लगभग 22 हजार दर्शकों के बैठने की क्षमता है। आईपीएल फ्रैंचाइजी द्वारा बनाए फैन बॉक्स और विशेष स्टैंड के कारण कुछ सीटें कम हो जाती हैं।

उधर, एचपीसीए के महासचिव मनुज शर्मा ने बताया कि आईपीएल में टिकट बिक्री का अधिकार पूरी तरह फ्रैंचाईजी के पास होता है। इसमें एचपीसीए की कोई भूमिका नहीं होती। उन्होंने बताया कि टिकटों के दाम भी फ्रैंचाईजी की ओर से ही तय किए गए हैं।

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