मऊ । जिले में वर्ष 1997/98 से अबैध तरीके से संचालित महात्मा बुद्ध समाज कल्याण प्राथमिक विद्यालय नगर क्षेत्र भीटी व उच्च प्राथमिक विद्यालय, भीटी की जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने मान्यता प्रत्यारित किये जाने की खबर हैँ। विद्यालय की मान्यता वर्ष 1997 और 1998 में उसी जमीन पर ली गई जिस पर आज भी यह विद्यालय अबैध तरीके से संचालित हों रहा हैँ।

विभागीय सूत्रों के अनुसार महात्मा बुद्ध समाज कल्याण प्राथमिक विद्यालय व महात्मा बुद्ध उच्च प्राथमिक विद्यालय, भीटी जनपद मऊ के खिलाफ पड़ी शिकायतों का संज्ञान लेते हुए विभाग ने माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेश के क्रम में जानचोपरान्त मान्यता प्रत्याहरण करते हुएगर शिक्षा ( खंड शिक्षा अधिकारी नगर क्षेत्र मऊ को निर्देशित किया गया हैँ कि तत्काल विद्यालय को बंद करते हुए उसमे अध्ययन रत छात्रों का नामांकन निकट के परिषदय विद्यालय में कराया जाना सुनिश्चित करते हुए अनुपालना आख्या 1हफ्ते के अंदर प्रेषित करने का आदेश जारी किया हैँ।

बेसिक शिक्षा अधिकारी मऊ के इस आदेश के बावजूद विद्यालय आज भी संचालिता किया जा रहा हैँ । जबकि निःशुल्क और अनिवार्य वाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 18 तहत बिना मान्यता के संचालन प्रतिबंधित हैँ और संचालन संज्ञेय अपराध हैँ। इसी अधिनियम की धारा 18(5) के तहत इस अपराध के लिए आरोपी प्रबंधक से 1लाख तक का जुर्माना व उलाँघन जारी रहने पर 10 हजार रूपये प्रतिदिन जुर्माने के प्रविधान हैँ और आरोपी प्रबंधक से वसूली योग्य हैँ।

उल्लेखनीय हैँ कि जिला वेसिक शिक्षा अधिकारी मऊ के द्वारा वर्ष 1997 व वर्ष 1998 में महात्मा बुद्ध समाज कल्याण प्राथमिक विद्यालय नगर क्षेत्र भीटी व महात्मा बुद्ध उच्च प्राथमिक विद्यालय, के नाम मान्यता जारी की गई।जबकि विद्यालय संचालन के लिए विद्यालय प्रबंधक रामाकार पाण्डेय द्वारा जमीन वर्ष 1999 में क्रय किया गया हैँ। जबकि स्थाई मान्यता आवेदन के दौरान विद्यालय के नाम जमीन का होना आवश्यक हैँ। संविधान की धारा 21(ए ) के तहत अमान्य विद्यालय में पढ़ाना बच्चों के मौलिक अधिकारों के हनन हैँ।

जिलाधिकारी के अधिकार
मान्यता विहीन संचालित विद्यालयों के प्रति जिलाधिकारी के पास निम्नलिखित अधिकार हैँ , जिसका जिलाधिकारी मऊ के द्वारा एवं तक संज्ञान नहीं लिया गया हैँ।👉 विद्यालय को सिल करना 👉 आर टी ई की धारा 18(5) के तहत 26/3/2026 से आज तक 10 हजार रूपये प्रतिदिन की दर से शास्ती अधिरोपित करते हुए कर वसूल किया जाये।👉 आपराधिक अभियोग पंजीकृत कराना 👉 छात्रों का समायोजन 👉 खंड शिक्षा अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही 👉 यह प्रकरण न केवल न्यायालय व शासन के आदेश के अवमानना का हैँ बल्कि छात्रों के संवैधानिक अधिकारों के हनन व संगठित अपराध का हैँ।








