किडनी रैकेट की जांच की आंच अन्य जिलों तक पहुंची, अन्य कई डॉक्टरों की तलाश में पुलिस

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कानपुर। महानगर में अंतरराष्ट्रीय किडनी तस्करी के मामले की जांच में रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं और कई अन्य डॉक्टरों के नाम भी सामने आ रहे हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। रावतपुर और कल्याणपुर क्षेत्र स्थित प्राइवेट अस्पताल से जुड़े इस पूरे प्रकरण में अब अन्य जिलों के अस्पतालों की संभावित संलिप्तता की भी जांच के दायरे में आ गए हैं। पुलिस पूछताछ में मिले नए तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

पुलिस उपायुक्त पश्चिम एस.एम. कासिम आबिदी ने बुधवार को बताया कि अब तक इस मामले में छह आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है लेकिन जांच के दौरान कुछ अन्य डॉक्टरों और सहयोगियों के नाम भी सामने आए हैं। इनमें से कई आरोपी फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि गिरोह का नेटवर्क पहले से कहीं अधिक व्यापक हो सकता है, इसलिए अन्य जनपदों के अस्पतालों को भी जांच के दायरे में लिया गया है।

उन्होंने बताया कि प्रकरण में किडनी बेचने वाले दो व्यक्तियों से भी विस्तृत पूछताछ की गई है, जिससे कई नए तथ्य सामने आए हैं। इन तथ्यों के आधार पर पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। दोनों डोनर्स का फिलहाल उपचार जारी है, उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और उनके परिजनों को भी इसकी सूचना दे दी गई है। जांच में यह भी सामने आया है कि किडनी देने वाला एक युवक देहरादून का रहने वाला एमबीए छात्र है। उसने आर्थिक तंगी और फीस जमा करने के दबाव में यह कदम उठाया। यह खुलासा इस पूरे रैकेट के उस कड़वे सच को उजागर करता है, जिसमें मजबूरी और पैसों का लालच मिलकर लोगों को इस अवैध जाल में धकेल देते हैं।

उन्होंने बताया कि पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है और हर पहलू को ध्यान में रखते हुए विवेचनात्मक कार्रवाई जारी है। फरार आरोपितों की गिरफ्तारी और नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। इससे पहले पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई में कल्याणपुर और रावतपुर स्थित अहूजा, प्रिया और मिड लाइफ अस्पतालों पर छापेमारी कर गिरोह का भंडाफोड़ किया गया था। मौके से नकदी और बड़ी मात्रा में संदिग्ध दवाइयां बरामद की गई थीं। गिरफ्तार आरोपितों में डॉ. प्रीति आहूजा और डॉ. सुजीत सिंह आहूजा समेत छह लोग शामिल हैं। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, खासकर टेलीग्राम के जरिए मरीजों और डोनर्स को जोड़ता था। अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क के अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी गहराई से पड़ताल कर रही है।

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