ईंधन कीमतों में उछाल से उड्डयन क्षेत्र पर दबाव, यूनाइटेड एयरलाइंस घटाएगी उड़ानें

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न्यूयॉर्क। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण बढ़ती जेट ईंधन कीमतों ने वैश्विक उड्डयन उद्योग पर गहरा असर डालना शुरू कर दिया है। अमेरिका की प्रमुख एयरलाइन यूनाइटेड एयरलाइन्स ने घोषणा की है कि वह कम मांग वाली उड़ानों में कटौती करेगी। कंपनी के सीईओ स्कॉट किर्बी के अनुसार खासतौर पर सप्ताह के बीच (मिड-वीक) और रात की उड़ानों को अस्थायी रूप से कम किया जाएगा।

किर्बी ने बताया कि पिछले तीन हफ्तों में जेट ईंधन की कीमतें दोगुनी से अधिक हो गई हैं। फरवरी के अंत में जहां कीमत करीब 2.50 डॉलर प्रति गैलन थी, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 4.56 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई है। इस तेजी से कंपनी पर भारी आर्थिक दबाव पड़ा है और अनुमान है कि इससे इस साल करीब 11 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एयरलाइंस कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ धीरे-धीरे यात्रियों पर डाल सकती हैं। आने वाले महीनों में टिकट कीमतों में वृद्धि देखने को मिल सकती है, जिससे हवाई यात्रा महंगी हो सकती है।

हालांकि, एयरलाइंस उद्योग में मांग अब भी मजबूत बनी हुई है। अमेरिका की तीन बड़ी एयरलाइंस—यूनाइटेड एयरलाइंस, डेल्टा एयरलाइंस और अमेरिकन एयरलाइंस ने हाल ही में बुकिंग में तेजी की बात कही है।

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डेल्टा के सीईओ एड बैस्टियन ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद कंपनी के टिकट बिक्री के कई रिकॉर्ड दिन रहे हैं, लेकिन ईंधन लागत के कारण कंपनी को करीब 400 मिलियन डॉलर का नुकसान झेलना पड़ा है।

इस बीच कतर एयरवेज ने भी अपने बड़े विमानों को स्पेन में दीर्घकालिक स्टोरेज में भेजना शुरू कर दिया है, जो संभावित उड़ान कटौती का संकेत देता है।

उल्लेखनीय है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो एयरलाइंस कंपनियों के लिए मौजूदा मांग के बावजूद लागत संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में उड़ानों में कटौती और किराए में बढ़ोतरी जैसे कदम आने वाले समय में और स्पष्ट हो सकते हैं।

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