देश में पहली जुलाई से लागू होगा ‘विकसित भारत-जी राम जी’ अधिनियम, ग्रामीण परिवारों को मिलेगी 125 दिन रोजगार की गारंटी

0
9

 

– मनरेगा की जगह लेगा नया कानून, 95,692 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बजट आवंटन; पुराने जॉब कार्ड रहेंगे मान्य

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ग्रामीण विकास और रोजगार को नई दिशा देने के उद्देश्य से ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी विकसित भारत (वीबी) –जी राम जी अधिनियम, 2025 को अधिसूचित कर दिया है। यह नया कानून 1 जुलाई 2026 से देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा और इसके साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), 2005 निरस्त माना जाएगा।

सरकार के अनुसार नए अधिनियम के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हैं, हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वैधानिक रोजगार की गारंटी दी जाएगी। वर्तमान में मनरेगा के तहत 100 दिनों के रोजगार का प्रावधान है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के बयान में कहा गया कि यह अधिनियम विकसित भारत@2047 के विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास को अधिक समेकित, उत्पादक और भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

अधिनियम के तहत रोजगार की मांग करने वाले श्रमिकों को तय समय-सीमा के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। निर्धारित अवधि में काम नहीं मिलने पर श्रमिक बेरोजगारी भत्ते के पात्र होंगे। सरकार ने मजदूरी भुगतान व्यवस्था को भी अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने का दावा किया है। मजदूरी का भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे बैंक या डाकघर खातों में किया जाएगा। मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर भुगतान नहीं होने पर श्रमिकों को विलंब मुआवजा दिया जाएगा।

Advertisement

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना के लिए 95,692.31 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन किया है, जिसे ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों के लिए अब तक का सबसे बड़ा प्रारंभिक आवंटन बताया गया है। राज्यों के अंश सहित कुल व्यय 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मनरेगा से नई व्यवस्था में संक्रमण बिना किसी बाधा के किया जाएगा। 30 जून 2026 तक चल रहे सभी मनरेगा कार्य जारी रहेंगे और बाद में उन्हें नए अधिनियम के तहत समाहित कर लिया जाएगा।

मौजूदा ई-केवाईसी सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड, नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी होने तक मान्य रहेंगे। सरकार ने यह भी कहा कि केवल ई-केवाईसी लंबित होने के आधार पर किसी भी श्रमिक को रोजगार से वंचित नहीं किया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बताया कि अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभिन्न नियमों के प्रारूप राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के परामर्श से तैयार किए जा रहे हैं। इनमें शिकायत निवारण, मजदूरी भुगतान, प्रशासनिक व्यय और संक्रमणकालीन प्रावधानों से जुड़े नियम शामिल हैं।

सरकार का कहना है कि नया अधिनियम ग्रामीण रोजगार सृजन, आधारभूत ढांचे के विकास और गांवों में आत्मनिर्भरता को नई गति देगा तथा ग्राम पंचायतों को ग्रामीण परिवर्तन के केंद्रीय स्तंभ के रूप में मजबूत करेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here