बिना “परमिट” के यात्री ढो रहे एक निजी बस का 70 बार पूर्व मे हुए चालान के बाद यातायात प्रभारी के द्वारा अबैध तरीके से यात्रियों को ढोने आदि को लेकर बस को सीज करने पर बस संचालक द्वारा यातायात प्रभारी की शिकायत करने पर एसपी द्वारा प्रभारी यातायात को लाइन हाजिर करने को लेकर चर्चाओ का बाजार गरम हों गया हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार पुलिस अधीक्षक के द्वारा बस संचालक की शिकायत की बिना जाँच किये, यातायात प्रभारी के खिलाफ की गईं कार्यवाही को एसपी द्वारा “जल्दी” मे की गईं “कार्यवाही करार” दे रहे हैं।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार के अनुसार यातायात प्रभारी ने बस को सीज करने के बाद उसमे सवार महिलाये, बुजुर्गो और बच्चों को उनके गंतबी तक जाने की बाइकल्पिक ब्यवस्था नहीँ किये जाने के आरोप पर यातायात प्रभारी के खिलाफ कार्यवाही किये जाने की बात कही हैँ।
👉यातायात प्रभारी ने आरोप को बेबुनियाद करार देते हुए आरोपी बस संचालक के पास बस से सवारियों को ढोने का “परमिट” नहीँ होने और पूर्व मे 70 चालान होने की जानकारी दी हैं।
बिना शिकायत क़ी जांच,पर कार्यवाही, कही जल्दीबाजी क़ी कार्यवाही तो नहीं?
यातायात प्रभारी के द्वारा अविधिपूर्ण तरीके यात्री धो रहे बस के खिलाफ कार्यवाही पुलिस अधीक्षक को क्यों नहीं रस आई? को लेकर तरह तरह क़ी चर्चाये ब्याप्त हों गई है। हर कोई मामले को जानने के लिए अपने करीबी पुलिस मित्रो से जानकारी चाह रहे हैँ । बहरहाल एसपी के फैसले को लेकर कहीं धुप तो कही छाँव जैसा माहौल हैँ । अधिकांश लोग एसपी के निर्णय को जल्दीबाजी मे लिए गए फैसले क़ी संज्ञा दे रहे हैँ।








