प्रयागराज। मऊ जनपद से जुड़े एक मामले मे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निजी जमीन पर सड़क निर्माण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मामले मे अदालत ने निजी जमीन पर सड़क निर्माण पर रोक लगाते हुए, सरकार से जबाब तलब किय्या हैं।
मामला श्रीमती आशा त्रिपाठी बनाम राज्य सरकार व अन्य से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि उनकी निजी जमीन पर जबरन सड़क का निर्माण कराया जा रहा है, जबकि इस मामले में निचली अदालत द्वारा पहले ही स्टेटस-को (Status Quo) का आदेश दिया गया था।
कोर्ट ने पाया कि निचली अदालत के आदेश के बावजूद सड़क निर्माण का कार्य जारी रखा गया, जिसे न्यायालय ने गंभीरता से लिया। इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अदालत के आदेशों की अवहेलना किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने मधुबन (मऊ) के एसडीएम को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है और उनसे जवाब मांगा है कि अदालत की अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक संबंधित स्थान पर सड़क निर्माण का कार्य पूरी तरह स्थगित (स्टे) रहेगा।
इस मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है। यदि संबंधित अधिकारी कोर्ट में उपस्थित नहीं होते हैं, तो न्यायालय उनके खिलाफ जमानती या गैर-जमानती वारंट जारी करने की कार्रवाई भी कर सकता है। मामले मे याचिका कर्ता के अधिवक्ता राघवेद्र त्रिपाठी आदि ने वकालत की।




