इबोला पर केंद्र सरकार का देशवासियों को परामर्श, कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की यात्रा करने से बचें

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने इबोला प्रभावित देशों में बदलती स्थिति को देखते हुए और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सिफारिशों के अनुरूप सभी भारतीय नागरिकों को अगली सूचना तक कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है। कांगो, युगांडा और उसकी सीमा से लगे दक्षिण सूडान और अन्य देशों में बीमारी फैलने सबसे अधिक खतरा है।

स्वास्थ मंत्रालय ने यह परामर्श जारी किया है। परामर्श के अनुसार भारतीय नागरिक जो वर्तमान में इन देशों में रह रहे हैं या यात्रा कर रहे हैं, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी सार्वजनिक स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें और अतिरिक्त सावधानी बरतें। डब्ल्यूएचओ की आपातकालीन समिति ने 22 मई को आगमन के प्रवेश बिंदुओं पर बीमारी की निगरानी को मजबूत करने के लिए कुछ अस्थायी सिफारिशें जारी कीं। इन सिफारिशों में ‘बुंडिबुग्यो वायरस पाए जाने वाले क्षेत्रों की यात्रा न करने’ की भी सलाह दी गई है।

भारत में बुंडिबुग्यो वायरस स्ट्रेन के कारण होने वाली इबोला बीमारी का अबतक कोई भी मामला सामने नहीं आया है। इबोला रोग एक वायरल हेमोरेजिक बुखार है, जो इबोला वायरस के ‘बुंडीबुग्यो’ स्ट्रेन के संक्रमण के कारण होता है। यह एक गंभीर बीमारी है, जिसमें मृत्यु दर काफी अधिक है। वर्तमान में बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के कारण होने वाले इबोला रोग की रोकथाम या उपचार के लिए किसी भी टीके या विशिष्ट उपचार को मंजूरी नहीं दी गई है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम, 2005 के तहत 17 मई को इस स्थिति को ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित किया था। अफ्रीकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र ने भी डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो और युगांडा को प्रभावित करने वाले बुंडिबुग्यो स्ट्रेन इबोला वायरस रोग के मौजूदा प्रकोप को आधिकारिक तौर पर ‘महाद्वीपीय सुरक्षा का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित किया है।

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