मऊ । जिला प्रसाशन के द्वारा नियमों की अनदेखी कर नियम विरुद्ध बने हॉस्पिटल भवनों में संचालित अस्पतालो के पंजीयन की सोमवार को एक और प्रसूता की इलाज के दौरान मौत हों गई। इलाज के दौरान संबंधित चिकित्सक को हॉस्पिटल में नहीं रहने का आरोप लग रहा हैँ तो वही पर चिकित्सक पर मृतका के परिजनों पर दबाव बनाकर समझौते का आरोप भी लग रहा हैँ। फिलहाल मौके पर पुलिस मौजूद हैँ। मौत साईं हॉस्पिटल में हुई हैँ ।
उल्लेखनीय हैँ कि जिले में नियमों को ताक पर अधिकांश अबैध हॉस्पिटलो को विभाग के द्वारा पंजीकृत कर उन्हें बैध होने का प्रमाण पत्र दे दिया गया हैँ। अधिकांश हॉस्पिटलो की बिल्डिंग नियम विरुद्ध और अबैध निर्मित हैँ फिर भी इन हॉस्पिटलो के भवानों को अग्नि समन विभाग के द्वारा वर्ष 2005 में माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ खंड पीठ के योजित जनहित याचिका संख्या 5696(एम बीं )/ 2005 में पारित आदेश और इस पारित आदेश के समर्थन में पारित सरकारी आदेश की अनदेखी कर मुख्य अग्नि समन अधिकारी मऊ के द्वारा एन ओ सी जारी कर, अबैध पंजीयन में सहयोग दिया गया हैँ। मुख्य अग्नि सामान अधिकारी के द्वारा पदीय अधिकारों की आड़ मे की गईं मनमानी के कारण अधिकांश अबैध हॉस्पिटल वैध हास्पिटलो की सूची मे शामिल हो गए हैं। विभाग की इस मनमानी के कारण जनता भी शिकार हो रही हैं।
प्रत्यक्ष दर्शियो की माने तो प्रसूता की मौत के बाद हॉस्पिटल की जिम्मेदार चिकित्स्कों हॉस्पिटल में मौजूद नहीं थी, प्रशव का कार्य हॉस्पिटल में मौजूद नर्सो ने किया कराया । बलिया से एक तीमाँरदार ने नाम नहीं छापने की शर्त बताया कि उनका भी एक मरीज इसी हॉस्पिटल में भर्ती हैँ , इस मौत के पीछे चिकित्सकों की लापरवाही देख कर खुद के मरीज को डिस्चार्ज कराने की बात कह रहे हैँ। बहरहाल प्रसूता की इलाज के दौरान मौत को लेकर समाचार दिए जाने तक हॉस्पिटल की तरफ से कोई आधिकारिक बयान खरी दुनिया के हाथ नहीं लगा हैँ। प्रसूता की मौत कैसे किन स्थितियों में हुई, कोई पक्ष सार्वजनिक नहीं किया हैँ।
बंदना नर्सिंग होम का विभागीय अधिकारी के द्वारा आपसी साथ गांठ में, 8 फिट चौड़ी गली में करवाया जा रहा हैँ संचालन . बंदना नर्सिंग होम का संचालन एक बानगी हैँ। पनिकृत हॉस्पिटलो के पंजीयन में लगाए गए दस्तावेजो की यदि नियमों को सामने रखकर जांच कर दी जाए तो, पंजीयन को नियम विरुद्ध पाए जाने सी नहीं रोका जा सकता हैँ।
राहुल हॉस्पिटल की जमीन ही राजस्व रिकॉर्ड में नान जेड ए और जेड ए दोनों में अंकित होते हुए कश्रेणी 6(1) की जमीन हैँ। उपजिलाधिकारी के द्वारा अपनी जाँच में इन तथ्यों का उल्लेख कार आज तक बचाया जा रहा हैँ।










