मऊ । पूर्व में इलाज के दौरान हुई 4 मौतो के बाद विभाग के द्वारा हॉस्पिटलो की वैधता पर उठे सवालों से निजात पाने के लिए जिले के अबैध भवनों में संचालित हॉस्पिटलो के लिए निर्धारित मानको की अनदेखी कर पंजीयन कर बैध बनाये जाने की खबर हैँ। जनकल्याण सेवा समिति बणाम उत्तर प्रदेश सरकार 5696(एमबी) /2005 में पारित आदेश की अधिकांश हॉस्पिटलो के पंजीयन में जानबूझकर अनदेखी की गई हैँ । अधिकांश भवन के नक्शे पहले से पास हैँ या फिर कंपाउंड कराकर उसमे हॉस्पिटल संचालित कराया जा रहा हैँ जबकि प्रोविशनल रूप से स्वीकृत हॉस्पिटलो के भवन के निर्माण दौरान अग्नि समन की ब्यवस्थाओ का समय समय पर निरीक्षण कर मुख्य अग्नि सामन अधिकारी द्वारा प्रेषित अंतिम रिपोर्ट के बाद हॉस्पिटल के भवन के नक्शे की स्वीकृति का आदेश हैँ।
माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ खंड पीठ के द्वारा याचिका संख्या 5696(एमबी )/ 2005 में पारित आदेश बाद जारी शसनादेस का जिले के अधिकांश हॉस्पिटलो के द्वारा अनदेखी की और कराई गई। नेशनल बिल्डिंग कोड 2005 में भी हॉस्पिटल भवन के लिए वर्णित प्रविधानो का भी पूरी तरीके से अनदेखी कर अबैध भवनों में संचालित अबैध हॉस्पिटलो को विभाग के द्वारा पंजीयन कर दिया गया हैँ। विभाग के द्वारा ऐसे पंजीयन का दोनों बड़ा उदाहरण वर्षो से इलाज के नाम पर उगाही कर रहा हैँ।
👉 बंदना नर्सिंग होम , इस हॉस्पिटल के भवन को उच्च शक्ति विजली के तार के निचे होने के बावजूद विभाग ने इस हॉस्पिटल का पंजीयन किया था। मामला उच्च न्यायालय में जाने पर विभाग ने हॉस्पिटल भवन को सील करते हुए नेशनल बिल्डिंग कोड 2005 के प्रविधानो की अनदेखी कर विभाग के द्वारा हॉस्पिटल को एक 10 फिट चौड़ी गली में संचालित कराया जा रहा हैँ।
👉राहुल हॉस्पिटल, इस हॉस्पिटल की जमीन नान जेड ए में पहले से अंकित होते हुए राजस्व विभाग के यू एफ ओ 4 में कश्रेणी 6(1) की हैँ। उपजिलाधिकारी सदर ने पदीय अधिकारों की आड़ me मनमानी करते हुए एक शिकायत के निपटारे में इसकी जमीन को नान जेड ए और जेड ए दोनों अंकित बताकर श्रेणी (6/1) की होने से इंकार करते हुए शिकायत को सही नहीं पाया जाना बता कर तथ्य के बिपरीत रिपोर्टिंग कर आरोपी जमीन और जमीन के स्वामी को कार्यवाही से बचाने का कार्य किया । इसी जमीन पर राहुल हॉस्पिटल का संचालन किया और कराया जाता हैँ।








