जयपुर,। राजस्थान हाईकोर्ट ने रोडवेज में तैनात चालकों की कार्यक्षमता जांचने के लिए अदालती आदेश पर मेडिकल नहीं कराने को गलत माना है। इसके साथ ही अदालत ने उन्हें चार्जशीट देने की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाते हुए रोडवेज प्रशासन से जवाब तलब किया है। अदालत ने कहा है कि यदि याचिकाकर्ता अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं तो उनका मासिक वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए। जस्टिस कुलदीप माथुर की एकलपीठ ने यह आदेश सुरेश कुमार व्यास व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता सुनील कुमार सिंगोदिया ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता रोडवेज में चालक पद पर नियुक्त हुए थे। उन्हें मेडिकल बोर्ड की राय पर चालक पद से हटाकर ऑफिस कार्य के लिए नियुक्त किया गया। वहीं बिना किसी वैध कारण रोडवेज ने उनका वेतन रोक लिया। इसे चुनौती देने पर हाईकोर्ट ने गत 27 अप्रैल को आदेश जारी कर नियम को याचिकाकर्ताओं का नए सिरे से मेडिकल कराने को कहा। इससे चार दिन पूर्व रोडवेज प्रशासन ने याचिकाकर्ताओं को आरोप पत्र जारी कर दिया। जिसे चुनौती देते हुए कहा गया कि एक तरफ तो निगम प्रशासन बिना कारण उनका मेडिकल नहीं करा रहा है, वहीं दूसरी ओर उन्हें चार्जशीट जारी कर वेतन रोकने की कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में रोडवेज की ओर से जारी आरोप पत्र को रद्द कर उन्हें वेतन दिलाया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने आरोप पत्र पर रोक लगाते हुए कार्य करने की स्थिति में उन्हें वेतन देना सुनिश्चित करने को कहा है।









