सुर अच्छे हैं, क्योंकि वे सच्चे हैं

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आज ऐसा कौन होगा जिसे संगीत से प्रेम न हो। तनाव में संगीत से जहां राहत मिलती है, वहीं खुशियों में संगीत से उन्हें झूमने की वजह मिल जाती है। संगीत आनंद की उस अनमोल धरोहर का नाम है, जिसके बिना कला का संसार अधूरा सा प्रतीत होता है। हाल ही में आई किताब “शब्द उठान सुर तिहाई” इसी संगीत-जगत का वह सुंदर पन्ना है, जो पाठकों को सुरों, साधना और कलाकारों की अद्भुत दुनिया से परिचित कराती है।

इस पुस्तक में केवल गीत, संगीत और गायन की चर्चा भर नहीं है, बल्कि उन गीतकारों, संगीतकारों और गायकों या यूं कहिए कलाकारों के जीवन से जुड़ी ऐसी प्रेरक और रोचक कहानियाँ भी हैं, जिन्होंने अपनी साधना, समर्पण और प्रतिभा से संगीत को नई ऊँचाइयाँ दीं।

किताब के लेखक देव प्रकाश चौधरी ने इन प्रसंगों को शब्दों की ऐसी माला में पिरोया है कि पाठक स्वयं को उन महफ़िलों, दरबारों और संगीत सभाओं का हिस्सा महसूस करने लगता है। पुस्तक में वर्णित प्रसंग और गायिका गौहर जान, बेनज़ीर बाई से लेकर रविन्द्र जैन और आर डी बर्मन के अलावा तमाम संगीत घरानों से जुड़ी कहानियां संगीत के अलावा बीते दौर की छवि भी पेश करती हैं।

यह पुस्तक करोड़ों संगीत प्रेमियों के लिए तो विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र है ही, साथ ही उन पाठकों के लिए भी प्रेरणास्रोत है जो किसी भी कला के पीछे छिपे संघर्ष, अनुशासन और समर्पण को समझना चाहते हैं। उन कहानियों के मर्म को महसूस करना चाहते हैं, जिनकी बदौलत भारतीय संगीत आज इतना समृद्ध है। सरल भाषा, रोचक शैली और प्रेरक प्रसंग इस पुस्तक को विशिष्ट बनाते हैं। आज की वर्तमान पीढ़ी को भी संगीत की जड़ों से रूबरू कराने का काम भी यह किताब करती है। इसके लिए किताब के लेखक को विशेष साधुवाद।

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“शब्द उठान सुर तिहाई” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की विरासत, उसके कलाकारों और उनकी साधना को समर्पित एक सुंदर दस्तावेज़ भी है। संगीत और साहित्य के संगम की इस दुनिया को महसूस करना चाहते हैं, तो यह पुस्तक अवश्य पढ़ी जानी चाहिए।

— रोहित राय

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