कैट–श्रीराम फाइनेंस ने लॉन्च किया फिनटेक पोर्टल, व्यापारियों तक आसान होगी क्रेडिट पहुंच

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नई दिल्ली। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने शुक्रवार को देश के प्रतिष्ठित वित्तीय समूह श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड की साझेदारी में फिनटेक पोर्टल लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य देशभर के व्यापारियों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और महिला उद्यमियों के लिए सहज रूप से ऋण की उपलब्धता को बढ़ाना है।

इस पोर्टल का शुभारंभ सांसद एवं कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल और श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड के संयुक्त प्रबंध निदेशक एवं मुख्य परिचालन अधिकारी जीएम जिलानी ने आज नई दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में किया गया। इस अवसर पर खंडेलवाल ने बताया कि कैट के सदस्यों और व्यापारियों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया ये पोर्टल श्रीराम फाइनेंस लिमिटड के मजबूत ऋण वितरण तंत्र के साथ जोड़ेगा, जिससे व्यापारियों को विभिन्न वित्तीय उत्पादों तक पहुंचने में आसानी होगी। यह फिनटेक प्लेटफॉर्म विभिन्न प्रकार की वित्तीय सुविधाएं प्रदान करेगा, जिनमें एमएसएमई ऋण (सुरक्षित एवं असुरक्षित), व्यक्तिगत ऋण, स्वर्ण ऋण, दोपहिया वाहन ऋण तथा वाणिज्यिक वाहन वित्तपोषण शामिल हैं।

खंडेलवाल ने कहा कि यह प्लेटफॉर्म व्यापारियों को डिजिटल माध्यम से ऋण आवेदन करने की सुविधा देगा, जबकि अंतिम प्रक्रिया और वितरण श्रीराम फाइनेंस के व्यापक शाखा नेटवर्क के माध्यम से पिनकोड के आधार पर किया जाता है। यह हाइब्रिड मॉडल गति, पहुंच और व्यक्तिगत सहायता सुनिश्चित करता है, जिससे डिजिटल सुविधा और जमीनी स्तर पर सेवा के बीच की खाई को पाटा जा सके। सांसद ने कहा कि कैट के विशाल नेटवर्क और श्रीराम फाइनेंस की मजबूत ऋण क्षमताओं को जोड़कर हम व्यापारियों को सरल, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से औपचारिक वित्त तक पहुंच प्रदान कर रहे हैं।

 

श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड के संयुक्त प्रबंध निदेशक एवं मुख्य परिचालन अधिकारी जीएम जिलानी ने कहा कि यह साझेदारी विश्वसनीय नेटवर्क के माध्यम से ऋण पहुंच का विस्तार करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि व्यापारी और छोटे व्यवसाय भारत की विकास यात्रा के केंद्र में हैं। कैट की मजबूत जमीनी पहुंच का लाभ उठाते हुए हम अपने वित्तीय समाधान वहां तक पहुंचा रहे हैं, जहां उनकी सबसे अधिक आवश्यकता है। जिलानी ने कहा कि यह पोर्टल लॉन्च ऐसे समय में हुआ है, जब व्यापारी और छोटे व्यवसाय अभी भी औपचारिक ऋण तक पहुंच में चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

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