अग्निशमन व्यवस्था का आधुनिकीकरण समय की जरूरत, रिस्पांस टाइम हो सुनिश्चित : अमिताभ बाजपेयी

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कानपुर। प्रदेश में बढ़ रही अग्निकांड की घटनाओं को देखते हुए अब केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि अग्निशमन व्यवस्था में व्यापक और स्थायी सुधार की आवश्यकता है। आधुनिक तकनीक, पर्याप्त संसाधन और त्वरित आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था विकसित कर ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती है। यह बातें सोमवार को आर्यनगर सपा विधायक अमिताभ बाजपेयी ने मुख्यमंत्री एवं प्रमुख सचिव (आवास) को भेजे गए सुझावों के प्रस्ताव के संबंध में कही।

विधायक अमिताभ बाजपेयी ने हाल ही में लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं कई परिवारों को अपूरणीय क्षति पहुंचाती हैं। उन्होंने कहा कि केवल भवनों को सील करना समाधान नहीं है, बल्कि अग्निशमन एवं आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को तकनीकी रूप से सक्षम, आधुनिक और जवाबदेह बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने अपने प्रस्ताव में कहा कि किसी भी अग्निकांड के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होना चाहिए कि अग्निशमन दल कितनी जल्दी मौके पर पहुंचा, उसके पास पर्याप्त संसाधन थे या नहीं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।

विधायक ने सुझाव दिया कि प्रदेश भर में अग्निशमन विभाग का अधिकतम 10 से 15 मिनट का रिस्पांस टाइम सुनिश्चित किया जाए। साथ ही विभाग के संसाधनों और उपलब्धता पर श्वेत पत्र जारी किया जाए। संकरी गलियों के लिए छोटे फायर टेंडर और मोटरसाइकिल आधारित फायर रिस्पांस यूनिट की व्यवस्था करने, प्रमुख शहरों में फायर हाइड्रेंट नेटवर्क का विस्तार करने तथा आपात स्थिति के लिए सामुदायिक जल स्रोत विकसित करने की भी मांग की।

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उन्होंने जीपीएस आधारित आधुनिक डिस्पैच सिस्टम, ड्रोन सर्विलांस और डिजिटल रिस्पांस सिस्टम लागू करने, भवन स्वामियों के साथ संबंधित विभागीय अधिकारियों की भी जवाबदेही तय करने तथा सुधार योग्य संस्थानों को समयबद्ध अवसर देकर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराने का सुझाव दिया। इसके अलावा प्रत्येक नगर, वार्ड और मोहल्ले में प्रशिक्षित सामुदायिक अग्निशमन स्वयंसेवकों का नेटवर्क विकसित करने की भी वकालत की।

अमिताभ बाजपेयी ने बताया कि अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक और उत्तरदायी बनाने संबंधी विस्तृत प्रस्ताव मुख्यमंत्री कार्यालय में विधिवत प्रस्तुत कर दिया गया है। इसके बाद विधानसभा भवन में याचिका समिति की बैठक समाप्त होने पर उन्होंने प्रमुख सचिव (आवास) से मुलाकात कर उन्हें भी यह प्रस्ताव सौंपा तथा प्रदेश की अग्निशमन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के संबंध में विस्तार से चर्चा की।

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